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उत्‍तराखंड में कांग्रेस और भाजपा जुटीं जोड़ तोड़ में

Uttrakhand Election 2012
देहरादून। उत्‍तराखंड में इस बार जनता ने कांग्रेस और भाजपा दोनों में से किसी को भी स्‍पष्‍ट बहुमत नहीं हासिल हो पाया है। दोनों पार्टियों में 1 सीट का फासला है। राज्‍य की 70 विधानसभा सीटों में से 32 सीटें जीतकर कांग्रेस 31 सीटें जीतने वाली भाजपा से एक कदम आगे है। बसपा को जहां 3 सीटें मिली हैं वहीं अन्‍य ने 4 सीटों पर अपना कब्‍जा जमाया है।

अन्‍य और बसपा को मिलाकर जो 7 सीटें हैं ये ही मिलकर तय करेंगी कि उत्‍तराखंड में किसकी सरकार बनेगी। सरकार बनाने के लिए कांग्रेस ने बसपा से समर्थन मांगा है। अभी तक इस मामले में बसपा की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। कांग्रेस और भाजपा में जो भी पार्टी बसपा को पटाने में कामयाब हो जाएगी सरकार बनाने को लेकर उसका दावा मजबूत हो सकता है।

कांग्रेस जुटा सकती है 36 सीटें

राज्‍य में 1 सीट से भाजपा पर बढ़त हासिल करने वाली कांग्रेस का सरकार बनाने का दावा ज्‍यादा मजबूत दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए निर्दलीय उम्‍मीदवारों पर अपनी नजरें गढ़ा रखी हैं। अन्‍य की जो 4 सीटें हैं उनमें से 3 निर्दलीय हैं तो एक उम्‍मीदवार उत्‍तराखंड क्रांति दल का है। जिसने पहले ही यह ऐलान कर दिया था कि वह किसी भी कीमत पर भाजपा को अपना समर्थन नहीं देगा।

जो 3 निर्दलीय उम्‍मीदवार जीते हैं वे तीनों कांग्रेस के बागी विधायक हैं। कांग्रेस ने इनको मनाकर पार्टी में वापस लाने की मुहिम शुरू कर दी है। कांग्रेस की तरफ से मुख्‍यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हरीश रावत ने मंगलवार को इन निर्दलीय विधायकों से मुलाकात की। अब अगर कांग्रेस इन तीनों निर्दलीय उम्‍मीदवारों को पार्टी में वापस ले आती है तो वह सरकार बनाने के लिए जरूरी 36 सीटों के बहुत करीब पहुंच जाएगी। ऐसे में उसे यूकेडी के एक विधायक का भी समर्थन मिल सकता है।

इस हालत में कांग्रेस को बसपा से समर्थन लेने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। वैसे कांग्रेस ने मंगलवार को ही बसपा से समर्थन मांग लिया था। कांग्रेस बाहर की 7 सीटों में से ज्‍यादा से ज्‍यादा को अपनी तरफ मोड़कर सरकार को स्थिर बनाना चाहती है।

भाजपा ने भी नहीं छोड़ी है उम्‍मीद

भारतीय जनता पार्टी इस बार 31 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही है। इतना ही नहीं मुख्‍यमंत्री बीसी खंडूरी को इन चुनावों में हार मिली है जो पार्टी के लिए करारा झटका है। मगर इस हार के बावजूद भी भाजपा ने सरकार बनाने की अपनी उम्‍मीद छोड़ी नहीं है। भाजपा भी सरकार बनाने के जोड़ तोड़ में जुटी हुई है। जिसके लिए उसकी नजर बसपा और कांग्रेस के बागी निर्दलीय विधायकों पर है।

बसपा भी 3 सीटों के साथ सत्‍ता का सुख चाह रही होगी। जिस वजह से वह भाजपा को समर्थन दे सकती है। जिससे भाजपा 36 सीटों के आस-पास पहुंच जाएगी। वहीं बसपा का समर्थन पाने के बाद भाजपा निर्दलीय विधायकों को भी अपनी ओर मोड़ सकती है।

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