क्यों यूपी में फेल हुए कांग्रेस युवराज राहुल गांधी?
कारण नंबर 1 कमजोर संगठन : कांग्रेस के चुनावी प्रचार का हिस्सा बनें राहुल गांधी ने अपने चुनावी प्रचार में सबसे ज्यादा रैलियां की जिसमें भारी संख्या में लोग एकत्र हुए लेकिन कांग्रेस का राजनीतिक संगठन उसे वोट में तब्दील नहीं कर पाया। जिसके काऱण राहुल गांधी की मेहनक पानी में चला गया।
कारण नंबर 2 जाति-कार्ड: अपने परनाना नेहरू जी कर्मभूमि फूलपुर से चुनावी बिहुल फूंकने वाले राहुल गांधी ने चुनावी मंच से जहां विकास का मु्द्दा उठाया था वो प्रचार के अंतिम दौर तक जाति कार्ड पर आकर ठहर गया। विकास, शिक्षा की बात करने वाली कांग्रेस पार्टी अंत तक आते-आते जाति-कार्ड और मजहबी दांव खेलने लगी जिसके चलते जनता ने उसका साथ नहीं दिया।
कारण नंबर 3 पार्टी में फूट: एक कहावत है ना.. सूत ना कपास, फिर भी जुथ्थम-जु्त्था, जो पूरी तरह कांग्रेस पर फिट बैठती है। यूपी में कांग्रेस पिछले 22 साल से आने का रास्ता जोह रही है लेकिन इस बार पार्टी में कांग्रेस को जिंदा करने की नहीं सीटों को लेकर आपसी टकराव था जिसके चलते राहुल गांधी का प्रचार भी लोगों का रास नहीं आया, जो कि राहुल की विफलता का बहुत बड़ा कारण है।
कारण नंबर 4 नेताओं के बड़े-बड़े दावे: चुनाव के दौरान कांग्रेस के बड़े नेताओं का बड़बोलापन भी राहुल के खिलाफ रहा। चाहे वो सलमान खुर्शीद का बाटला हाउस एनकाउंटर पर संवाद हो या श्री प्रकाश जायसवाल का राष्ट्रपति शासन का दावा। यह सब बातें भी राहुल के खिलाफ हो गयीं।
कारण नंबर 5 यूपी में कांग्रेस का दमदार चेहरा नहीं: और अंत में सबसे अहम कारण, वो यह कि यह शुरू से तय था कि राहुल गांधी सीएम नहीं बनने वाले औऱ कांग्रेस किसी भी स्थानीय नेता को खड़ा कर पाने में असमर्थ रही जिसके चलते लोगों को राहुल पर तो भरोसा दिखा इसलिए वो उनकी रैलियों में नजर आये लेकिन कांग्रेस पर भरोसा नहीं रहा, इसलिए पार्टी को वोट नहीं दिया।













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