क्या संकेत दे रहा है बेनी का बयान?
बेनी प्रसाद मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के मुकाबले बसपा अध्यक्ष मायावती कांग्रेस के लिए बेहतर सहयोगी साबित होंगी अत: आवश्यकता होने पर कांग्रेस को बसपा से हाथ मिलाना चाहिए। बेनी वर्मा ने कहा कि विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस-रालोद गठबंधन 'किंगमेकर' की भूमिका में होगा और उस स्थिति में वह कांग्रेस-बसपा गठबंधन के पैरोकार होंगे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस-रालोद गठबंधन चुनाव में कम से कम सौ सीटें जीतेगा। उस स्थिति में प्रदेश में सरकार के गठन के लिए वह पार्टी द्वारा सपा के किसी तरह के समर्थन की खिलाफत करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रदेश में खण्डित जनादेश सामने आयेगा और उस स्थिति में सरकार के गठन में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
सपा का मुखर विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि यदि सपा की सरकार बनती है तो प्रदेश में गुण्डाराज की वापसी होगी। कभी मुलायम के करीबी रहे बेनी वर्मा ने सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को सा प्रदायिक बताते हुए कहा कि उन्होंने कई मौकों पर साम्प्रदायिक ताकतों के साथ हाथ मिलाये हैं और ताजा वाकया वर्ष 2009 का है जब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण ङ्क्षसह से हाथ मिला लिया था। बेनी वर्मा ने सपा के जनविरोधी रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि यदि सपा सत्ता में आयी तो फिर लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि वैसी स्थिति में सपा द्वारा किये गये सारे वायदे झूठे साबित होंगे। उन्होंने कहा कि चुनावी सर्वेक्षण गलत साबित होंगे तथा कांगेस-रालोद गठबंधन उससे ज्यादा हासिल करेगा जैसा दर्शाया गया है। बेनी वर्मा विधानसभा चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण केन्द्र बिन्दु बने रहे
क्योंकि उनकी सिफारिश पर करीब सौ लोगों को टिकट दिये गये थे।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपनी सभा के दौरान कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने बेनी वर्मा को अपना 'राजनीतिक गुरु' करार दिया था। गोण्डा लोकसभा सीट से सांसद श्री वर्मा को लेकर पार्टी में विद्रोह भी हुआ और कांग्रेसियों के विरोध के चलते पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की सभाओं के दौरान गोण्डा और बलरामपुर में उन्हें मंच भी छोडऩा पड़ा। उनका पुत्र राकेश वर्मा बाराबंकी की दरियाबाद सीट से चुनाव लड़ा है। इन सबके बीच कांग्रेस के अंदर क्या चल रहा है, यह नतीजों के बाद ही साफ हो सकेगा, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस मायावती का हाथ थाम ले।













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