भाजपा का रोना शुरू- नहीं हुआ उमा भारती का सही इस्‍तेमाल

लखनऊ। हम आप और जनता यह अच्‍छी तरह जानती है कि भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद उमा भारती ने खुद को पूरी तरह उत्‍तर प्रदेश इकाई के हवाले कर दिया। उन्‍होंने रात दिन कड़ी मेहनत की, धूप, बारिश और कोहरे में जनसभाएं कीं और हर मामले में आगे से आगे रहीं। लेकिन फिर भी भाजपा उनकी ऊर्जा का इस्‍तेमाल सही ढंग से नहीं कर पायी। इस बात का अहसास भाजपा को मतदान के बाद हो रहा है।

जी हां यह साबित होता है पूर्व केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वामी चिन्मयानन्द के बयान से। चिन्‍मयानंद ने कहा है कि उमा भारती की ऊर्जा का भाजपा सही इस्तेमाल नहीं कर पायी। उनका दावा है कि यदि उमा भारती को मुख्यमंत्री के रुप में आगे कर चुनाव लड़ा जाता तो भाजपा के पक्ष में चौंकाने वाले परिणाम आते। उन्होंने गोरखपुर के सांसद आदित्यनाथ और पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी को भी उपेक्षित रखने का आरोप लगाया।

स्वामी चिन्मयानन्द का दावा है कि इन नेताओं की काबिलियत को दरकिनार कर ईष्र्यावश चुनाव प्रचार और अन्य गतिविधियों से अलग नहीं रखा गया होता तो परिणाम अकल्पनीय होते। उन्होंने कहा कि पार्टी को इसका खामियाजा तो भुगतना ही पड़ेगा। अयोध्या आन्दोलन में अगली कतार के नेता रहे स्वामी चिन्मयानन्द ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब उमा भारती को लगाया गया था तो कार्यकर्ताओं में बेहद उत्साह था लेकिन पार्टी 'करंट को वेव लहरÓ में नहीं बदल पायी।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से सपा एकजुट होकर अखिलेश यादव के पीछे, कांग्रेस राहुल गांधी के पीछे और बसपा मायावती के पीछे वैसी ही जरूरत भाजपा को उमा भारती के पीछे खड़े होने की थी लेकिन दुर्भाग्य से पार्टी में यह नहीं हुआ। हाल ही में साध्वी चित्रपदा के आरोपों की वजह से सेक्स स्कैंडल के घेरे में आये चिन्मयानन्द ने कहा कि युवा बदलाव चाहता था। भाजपा उसकी पहली पसन्द और उम्‍मीद थी लेकिन मुख्‍यमंत्री या सरकार का नेतृत्व कौन करेगा इस पर पार्टी में एकमत नहीं था। नतीजा हुआ कि भाजपा पिछड़ गयी जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा।

चिन्‍मयानंद ने कहा कि यदि सुश्री उमा भारती को मुख्‍यमंत्री के रुप में भाजपा पेश कर देती तो आगामी छह तारीख को परिणाम चौंकाने वाले होते। उमा भारती इसे मध्यप्रदेश में साबित कर चुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को उमा भारती से क्या दिक्कत थी, यह पता नहीं चल सका लेकिन इतना तय है कि भाजपा ने अवसर गंवाया। यह अवसर उन लोगों की वजह से गंवाया गया जिनका बीस वर्षों से चेहरा देखते देखते जनता व कार्यकर्ता थक गये हैं। उन्होंने कहा कि बहुत अच्छा मौका था। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र, राजनाथ ङ्क्षसह और सूर्य प्रताप शाही को थका हुआ नेता बताते हुए कहा कि नितिन गडकरी, संजय जोशी और उमा भारती की नयी टीम कुछ कर सकती थी लेकिन मौका गंवाया गया।

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