समलैंगिकों पर फैसला एचआईवी वालों पर निर्भर

HIV AIDS
दिल्ली (ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट आजकल समलैंगिकों को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर सुनवाई कर रहा है। कुछ संस्थाओं द्वारा समलैंगिकों के आपसी संबंधों पर एचआईवी के खतरों से आगाह किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय से इस बाबत हलफनामा दाखिल कर उनकी सही स्थिति बताने को कहा है। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी एवं न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल मोहन जैन ने एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या के बारे में नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नाको) द्वारा जारी आंकड़े कोर्ट में पेश किए। इसके अनुसार पहली दिसंबर, 2010 को 23.9 लाख लोग एचआइवी संक्रमित थे। देश में कुल एचआईवी संक्रमित लोगों में से 55 फीसद दक्षिण भारत के चार राज्यों के हैं। हालांकि कोर्ट उनके द्वारा पेश आंकड़ों से बहुत संतुष्ट नजर नहीं आया।

पीठ ने कहा कि वे नाको के आंकड़ों पर नहीं जाएंगे, क्योंकि अन्य पक्षकारों की ओर से पेश किए गए संसदीय समिति के आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। पीठ ने जैन से कहा कि वह चाहते हैं कि स्वास्थ्य सचिव हलफनामा दाखिल कर एचआईवी संक्रमित लोगों के सही आंकड़े कोर्ट में पेश करें। इसके अलावा अन्य पक्षकारों की ओर से आज अपनी बहस जारी रखी गई। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन करने वाले पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नरीमन ने बहस की। उन्होंने कहा कि अप्राकृतिक यौनाचार को अपराध घोषित करने वाली भारतीय दंड संहित की धारा 377 स्पष्ट नहीं है।

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने दो वयस्क समलिंगियों द्वारा एकांत में बनाए गए संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। हाई कोर्ट ने अप्राकृतिक यौनाचार को अपराध की श्रेणी में लाने वाली धारा 377 को रद कर दिया था।

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