2 करोड़ भारतीय बच्चे पढ़ रहे हैं इंग्लिश मीडियम स्कूलों में

इतना ही नहीं लगातार चौथे साल तक इंग्लिश शिक्षा का दूसरा सबसे बड़ा मीडियम बना हुआ है। इस मामले में उसने बंगाली और मराठी को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि पिछले कुछ साल में हिंदी, मराठी, बंगाली और इंग्लिश सभी में रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या बढ़ी है मगर इंग्लिश मीडियम में रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
इस समय इंग्लिश सभी की जरूरत बन गई है। जिस वजह से लोग अपने बच्चों को इंग्लिश में तालीम देना चाहते हैं। इसके बावजूद भी सरकार इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। देश में इंग्लिश मीडियम के ज्यादातर प्राइवेट स्कूल ही हैं। जो लोगों से भारी फीस वसूल रहे हैं।
रिसर्च में यह बात साफ हो चुकी है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए वह माध्यम बेस्ट होता है जो उनकी मात्र भाषा होती है। अगर सरकारी स्कूलों में इंग्लिश की अच्छी पढ़ाई हो तो लोगों को अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में एडमिशन न कराना पड़ा।












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