लोकतंत्र के पर्व बाद अब रंगो के त्योहार के लिये पुलिस तैयार

होलिका दहन से लेकर रंग खेले जाने तक पुलिस के सामने 150 से अधिक संवेदनशील व अति संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा की कड़ी चुनौती रहती है। ऐसे में छह मार्च को मतगणना व चुनावी नतीजों का सामने आना पुलिस के लिए उससे बड़ी चुनौती होगा। मुहर्रम के दौरान पुराने लखनऊ में दो पक्षों के बीच हुए विवाद को शांत कराने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। हालांकि अर्द्धसैनिक बलों व पीएसी के जवानों की मदद से पुलिस ने जल्द हालात सामन्य करने में कामयाबी हासिल की थी।
19 फरवरी को सकुशल मतदान होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली थी लेकिन अब वे एक बार फिर नए सिरे से सुरक्षा की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। पुलिस के अलाअधिकारियों का कहना है कि चुनाव के मद्देनजर पुलिस ने भारी संख्या में निरोधात्मक कार्रवाई की है। असलहे भी जमा कराए गए हैं। यह असलहे होली के बाद ही वापस किए जाएंगे। वहीं निरोधात्मक कार्रवाई छह माह तक के लिए प्रभावी होती है लेकिन चुनाव के नतीजों व होली की संवेदनशीलता से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे मौकों पर लोग प्रतिशोध की भावना से अचानक गलत कदम उठा लेते हैं।
लिहाजा परिस्थितियां कम समय में ही बदल जाती हैं।
दूसरी ओर डीआईजी डीके ठाकुर कहते हैं कि चुनावी नतीजे व होली के लिहाज से छह से 9 मार्च तक का समय काफी चुनौतीपूर्ण होगा। कुछ लोग चुनावी परिणाम के दौरान हिंसा की आशंका भी जता रहे हैं। दो दिन बाद होली भी है। इस लिहाज से सामान्य तौर पर अवकाश नहीं दिया जा रहा है। विशेष परिस्थितियों में ही पुलिसकर्मियों को अवकाश दिया जाएगा। बताया गया कि मतगणना की सुरक्षा के लिए गैर जिलों से सीओ व एएसपी के अलावा अर्द्धसैनिक बलों व पीएसी के जवान आ रहे हैं। इन्हें होली तक तैनात रखा जाएगा। साथ ही होली के लिहाज से संवेदनशील स्थानों पर खास सतर्कता बरती जाएगी। ताकि शरारती तत्वों पर वक्त रहते नकेल कसी जा सके।












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