पेट्रोल-डीजल दामों में बढ़ोतरी दुर्भाग्यपूर्ण: अजय चौटाला

चंडीगढ़। इनेलो ने कांग्रेस सरकार द्वारा पेट्रोल व डीजल के दामों में एक बार फिर से बढ़ौतरी किए जाने के प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आम लोगों को बर्बाद करने वाला प्रयास बताया है। इनेलो के प्रधान महासचिव व डबवाली के विधायक डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कहा कि पांच राज्यों में चुनाव संपन्न होते ही फिर से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि किए जाने के प्रयासों से कांग्रेस का जनविरोधी चेहरा एक बार फिर लोगों में खुलकर सामने आ गया है।

उन्होंने कहा कि कभी कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ौतरी के नाम पर तो कभी डालर महंगा होने के नाम पर आए दिन कीमतें तो बढ़ा दी जाती हैं लेकिन कच्चे तेल की कीमतें घटने व डालर सस्ता होने पर उसी अनुपात में वापिस दरों में कटौती नहीं की जाती। डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कहा कि कांग्रेस सरकार जनहित में काम करने वाली एक निर्वाचित लोकतांत्रिक सरकार के तौर पर नहीं बल्कि ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में लगी हुई किसी निजी कंपनी की सीईओ की तरह व्यवहार कर रही है।

उन्होंने कहा कि निर्वाचित लोकतांत्रिक सरकारों का काम निजी कंपनियों की तरह मात्र लाभ-हानि के लिए काम करना न होकर लोगों को उनकी मूलभूत सुविधाएं सस्ते दरों पर उपलब्ध करवाना और उनका जीवनस्तर ऊंचा उठाने के लिए उन्हें राहत प्रदान करना होता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार जनहित की बजाय जनविरोधी फैसले लेकर गरीब व मध्यम वर्ग के परिवारों को उजाडऩे पर तुली हुई है। इनेलो विधायक ने कहा कि आज लोगों को डीजल 42 रुपए व पेट्रोल लगभग 70 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है जबकि पेट्रोल की वास्तविक कीमत 24-25 रुपए प्रति लीटर है और बाकी सब सरकारी टैक्स, आबकारी शुल्क, कस्टम ड्यूटी, आयात शुल्क, वैट व स्थानीय टैक्सों के रूप में पैसा सरकारी खजाने में जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ पेट्रोल-डीजल की कीमतों की आड़ में तेल कंपनियों अरबों रुपए का मुनाफा कमा रही हैं वहीं कीमतें बढऩे के साथ ही सरकारी के खजाने में भी अरबों-खबरों रुपए का अतिरिक्त टैक्स आ रहा है और इसके बावजूद घाटे का झूठा रोना रोकर आए दिन लोगों को बेवकूफ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कहा कि पहले सरकार ने पेट्रोल व डीजल पर यह कहकर भारी भरकम टैक्स लगाए थे कि इन टैक्सों से मिलने वाले राजस्व से तेल कंपनियों को अनुदान देकर उनके घाटे को पूरा किया जाता है। अब पेट्रोल की कीमतों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया गया और सरकार ने तेल कंपनियों को इस पर अनुदान देना बंद कर दिया लेकिन अनुदान देने के नाम पर लगाए गए भारी भरकम टैक्स ज्यों के त्यों कायम हैं और रेट बढऩे के साथ ही सरकारी राजस्व में भी कई गुणा ज्यादा बढ़ौतरी हो गई है।

उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी उस समय भी देश में पेट्रोल की कीमत मात्र 40 रुपए प्रति लीटर हुआ करती थी।

आज जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ समय से 107 डॉलर प्रति बैरल से 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रही हैं तो 70 रुपए प्रति लीटर वाले पेट्रोल की कीमतों में और ज्यादा बढ़ौतरी किए जाना आम लोगों के साथ बेहद ज्यादती व कांग्रेस सरकार की तानाशाही प्रवृत्ति का सबूत है। इनेलो विधायक ने कहा कि भारत एक बेहद गरीब देश होने के बावजूद पूरी दुनिया में पेट्रोल की कीमतें यहां सबसे ज्यादा होना यह दर्शाता है कि सत्ता में बैठे लोगों को आम आदमी की चिंता से कोई सरोकार नहीं है।

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