एमसीडी चुनाव के लिए रास्ता साफ

लिहाजा एमसीडी चुनाव के अप्रैल से टलने की अटकलों को विराम लग गया है। अदालत ने फैसले में कहा कि सरकार को अधिकार है कि वह दिल्ली चुनाव आयोग को सीटों के रोटेशन करने की शक्ति दे। जब दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों को बांटने का बिल संसद ने पास किया तो उसमें यह साफ था कि तीन हिस्सों में बंटी एमसीडी का चुनाव सन् 2001 की जनगणना के आधार पर होगा। लिहाजा इसमें भी कुछ गलत नहीं है। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति राजीव शकधर की खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि एमसीडी सीटों का रोटेशन विधानसभा के हिसाब से किया गया है। उन्हें इसमें कोई दिक्कत नहीं लगती है कि कोर्ट अपनी ओर से इसमें कोई हस्तक्षेप करे। दरअसल हाईकोर्ट में तीन मुद्दों को लेकर याचिका दायर की गई थी। पहली यह कि एमसीडी आरक्षण के लिए सीटों का आरक्षण वार्ड की जनसंख्या के हिसाब से होना चाहिए न कि विधानसभा की जनसंख्या के हिसाब से। दूसरा यह कि सीटों का आरक्षण सन 2011 की जनगणना के आधार पर होना चाहिए। तीसरा मुद्दा यह था कि अनुसूचित जाति के लिए सीटों का आरक्षण वार्ड में उनकी संख्या के हिसाब से होना चाहिए न कि विधानसभा की संख्या के हिसाब से। सभी मुद्दों पर हाईकोर्ट ने दिल्ली चुनाव आयोग के निर्णय को सही ठहराया है।
कोर्ट ने कहा कि जब एमसीडी को तीन हिस्सों में बांटे जाने का बिल संसद में पास किया गया तो सरकार ने साफ कर दिया था कि इस बार एमसीडी की सीटों को रोटेशन 2001 की जनसंख्या के आधार पर होगा। लिहाजा उसमें कोर्ट कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि सीटों को आरक्षित करने का अधिकार दिल्ली सरकार को है चुनाव आयोग को नहीं, इस पर भी कोर्ट ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि सरकार को यह अधिकार है कि वह चुनाव के लिए सीटों का रोटेशन और आरक्षित करने का अधिकार चुनाव आयोग दे दे।












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