लोगों को 2002 तक सीमित रखना चाहता है मीडिया

8. कोई भी अगर मोदी की बुराई कर दे, तो मीडिया का चहेता बन जाता है। यहां पर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का नाम लेना चाहूंगा, जिन्होंने गुजरात के मामले को संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण में उठाया। मुशर्रफ ने कहा कि गुजरात में मुसलामनों पर अत्याचार होता है। इस पर मीडिया ने उनकी तारीफ करना शुरू कर दी। मजेदार बात यह है कि मीडिया के लिए वो मुशर्रफ इतने ऊपर उठ गये, जिन्होंने कारगिल युद्ध छेड़ा था। एक तीसरे दर्जे का क्रिमिनल मुशर्रफ मीडिया का फेवरेट बन गया था।
9. जो लोग गोधरा कांड के बाद गुजरात सरकार द्वारा उठाये गये कदमों के बारे में नहीं जानते हैं उन्हें यह पढ़ना चाहिये। यहां पर उन सवालों के जवाब हैं जो एसआईटी ने मोदी से पूछे। ये जवाब पिछले 10 साल से लोगों के मन में मिथ्या को दूर कर सकते हैं। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में मुसलमानों को कितने अवसर दिये गये तो यह पढ़ें। जो बेवकूफ लोग गुजरात में मुसलमानों की चिंता में रो रहे हैं, उन्हें यह जरूर पढ़ना चाहिये।
10. जैसा कि मैंने कहा था कि वाम दलों से प्रेरित मीडिया नरेंद्र मोदी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एक भी अवसर को नहीं छोड़ता है। यहां गौर करने वाली बात है कि सुप्रीम कोर्ट में जब गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार का मामला आया तो वामपंथी मीडिया को झटका लगा। ऐसे में वामपंथी मीडिया ने एक अन्य मुद्दा उठाया और मोदी के खिलाफ शुरू हो गया। यह जानते हुए भी कि कोर्ट ने मोदी को क्लीन चिट दे दी है, फिर भी मीडिया 2002 के लिए मोदी से माफी मांगने को कह रहा था। मीडिया द्वारा इस तरह की मांगें उसे अपाहिज बना देता है। आगे अगर आप मोदी का वो वक्तव्य पढ़ना चाहते हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर मैं दोषी हों तो मुझे फांसी पर लटका दो तो क्लिक करें।
11. हाल ही में आयोजित सद्भावना उपवास के दौरान मोदी द्वारा एक बेहतरीन कदम उठाया गया। गंदे खेलों के बावजूद कोर्ट ने मोदी के कदम की तारीफ की। इसके बावजूद मीडिया सद्भावना उपवार को चुनावी स्टंट करार दे रहा है। यहां मुझे याद आता है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे और बिहार में चुनाव होने वाले थे। तब लालू को राजद का अध्यक्ष कहने के बजाये उन्हें कांग्रेस गठबंधन के नेता के रूप में दर्शाया जा रहा था। बिहार में मुस्लिम वोटों को आकर्षित करने के चक्कर में लालू ने रेल बजट पेश करते हुए कहा कि जस्टिस बनर्जी के नेतृत्व वाला जांच आयोग गोधरा कांड की जांच करेगा। जबकि सच पूछिए तो वहां पहले से ही नानावटी आयोग इस कांड की जांच कर रहा था। यह आयोग केवल गोधरा ही नहीं बल्कि अन्य मामलों की भी जांच कर रहा है, जिसे मीडिया मोदी पर निशाना साधने के लिए उठा लेती है।
12. हमें संजीव भट्ट और श्रीकुमार द्वारा दिये गये बयानों से भी सावधान रहना चाहिये। उन्हें भी मीडिया ने जमकर उछाला। यहां या तो श्रीकुमार झूठ बोल रहे हैं या भट्ट। लेकिन दोनों में नरेंद्र मोदी के खिलाफ निजी स्वार्थ दिखाई देता है।
जैसा कि हमने कहा था, "हमने अनुभव किया लेकिन सीखना भूल गये”। जी हां हमने यह अनुभव तो किया कि मीडिया नरेंद्र मोदी को टार्गेट कर रहा है, लेकिन अब यह समय आ गया है जब हमें इन पर विश्वास करना बंद करना होगा। जो लोग इतिहास भूल चुके हैं और भविष्य में गलतियां नहीं करना चाहते हैं। एक राष्ट्र के रूप में 2004 और 2009 में लगातार भाजपा को वोट देना गलती नहीं थी और यह गलती नहीं होगी अगर लोग इसे 2014 में दोहरायेंगे। गोधरा कांड को 10 साल बीत चुके हैं। यह ध्यान देने वाली बात है कि दोनों ही समाज मं लोग आगे बढ़ चुके हैं और अब वो सुनहरे भविष्य की ओर देख रहे हैं। यह सिर्फ भारत का संप्रदायिक ब्रिगेड ही है जो आगे बढ़ना नहीं चाहता वो सभी को 2002 तक सीमित रखना चाहता है।












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