ठहरे हुए पानी में मायावती ने मारा कंकड़
वेस्ट यूपी में 129 में 80 सीट मुस्लिम, दलित व पिछड़ा बहुल सीटों को देखते हुए दलित, ओबीसी, मुस्लिम गठजोड़ की पैरोकारी की। उन्होंने कहा कि बसपा सर्वसमाज की पार्टी है। अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में विकास की गंगा बहाई है। बार-बार उन्होंने दलितों की आर्थिक स्थिति, उनके लिए चलाई गयी विभिन्न योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि क्या दलित नही चाहते कि उनकी बेटी या बहन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर फिर आसीन हो। उन्होंने चढ़ विपक्ष की छाती पर मुहर लगेगी हाथ पर.. नारे का उद्घोष कराते हुए दलितों से कहा कि वह आपसी मतभेद छोड़कर बसपा के पक्ष में वोट करें। उन्होंने बाटला कांड व सच्चर कमेटी की रिपोर्ट की बात कर मुस्लिम व आरक्षण को लेकर ओबीसी को भी खूब लुभाया।
एनआरएचएम घोटाले को लेकर जिस तरह मायावती ने केन्द्र को घेरा तो लगा कि वह ऐसा करके किसी तरह पूर्व मंत्री बाबूराम कुशवाहा को बचाने के साथ-साथ अपनी सरकार की छवि को भी जनता दरबार में साफ करना चाहती है। उन्होंने सर्वसमाज को गांधीजाल, मुलायम जाल व धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने वाली भाजपा के जाल से बचने का सुझाव देते हुए यह भी भरोसा दिलाने की कोशिश की कि पुन: प्रदेश में उनकी सरकार आ रही है। एफडीआई का जिक्र कर उन्होंने व्यापारियों व आम कारोबारियों व गन्ना मूल्य, किसान पंचायत व भूमि अधिग्रहण का जिक्र कर उन्होंने किसानों को भी लुभाने का प्रयास किया।
मायावती के निशाने पर हर पार्टी रही पर रालोद का उन्होंने नाम तक नही लिया। पश्चिमी उप्र अलग राज्य बनाने की पैरवी कर उन्होंने संदेश देने की कोशिश की। वेस्ट यूपी के विकास को लेकर जिस तरह उन्होंने केन्द्र सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया, उसके पीछे यहां की जनता को यह संदेश देने की कोशिश की गयी कि वेस्ट यूपी में बदहाल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए केन्द्र सरकार जिम्मेदार है। मायावती के इस बयान का चुनाव में क्या असर पड़ेगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है पर इतना जरूर कि उनके सभा के बाद बसपा में खुशी का माहौल है।













Click it and Unblock the Notifications