देसी गाय भी खतरे में, सरकार का ध्यान विदेशी पर

वैज्ञानिकों का कहना है कि देश में सदियों पुरानी तीन दर्जन से ज्यादा गाय की ऐसी नस्लें मौजूद हैं जो रोजाना 30 लीटर तक दूध देने में सक्षम हैं। इसके बावजूद देशी नस्लों को बढ़ावा देने के बजाए सरकार विदेशी गाय व भैंस केे सीमेन आयात कर घरेलू नस्लों को खराब कर रही है। उनकी संख्या लगातार कम हो रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. आर. एम. आचार्या ने बताया कि गाय का दूध हल्का होने के बावजूद कई मामलों में भैंस के दूध से ज्यादा लाभप्रद होता है। गाय के दूध में मां के दूध के सभी तत्व पाए जाते हैं।
यह बात वैज्ञानिकों ने शोध व अनुसंधान के जरिए साबित भी कर दी है। इसके बावजूद देश में गाय के दूध को बढ़ावा देने के बजाए भैंस के दूध को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इसका कारण दूध उत्पादन को बढ़ावा देना बताया जाता है। लेकिन दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डेयरियों व सरकार की यह नीति सही नहीं है क्योंकि देश में 30 लीटर तक दूध देने वाली गाय की लगभग 40 नस्लें उपलब्ध हैं। आचार्या के मुताबिक सदियों पुरानी गाय की नस्लें विलुप्त होने की स्थिति में आ गई हैं। गौ शालाओं के जरिए अब तक 68 नस्लों को संरक्षित किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि कृषि मंत्रालय व योजना आयोग से भी देशी गायों की नस्लों को संरक्षित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी गई है लेकिन अभी तक कोई उत्तर नहीं मिला है। भारतीय मवेशी संसाधन विकास फाउंडेशन (बीसीआरडीएफ) के प्रबंधक लक्ष्मी नारायन मोदी के मुताबिक देशी गाय की नस्लों को बचाने के लिए इसके दूध को बढ़ावा देना चाहिए। गाय के दूध को प्रीमियम दर पर बेचकर ऐसा किया जा सकता है। गौरतलब है कि हाल ही में हरियाणा सरकार ने भी राज्य में मुर्रा भैंस को संरक्षित करने के लिए योजना चलाई है।












Click it and Unblock the Notifications