मौलाना और अभिनेताओं ने दिलाई है पोलियो के खिलाफ जीत

देश को पोलियो मुक्त करने के लिए न सिर्फ सरकारी स्तर पर प्रयास किए गए, बल्कि तमाम मौलानाओं, अमिताभ बच्चन जैसे लगभग डेढ़ दर्जन सेलेब्रिटी, क्रिकेट खिलाड़ी और टेनिस स्टार सानिया मिर्जा ने भी इस जंग को जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तान और भारत के रिश्ते को लेकर सीमाओं पर तनाव किसी से छिपा हुआ नहीं है लेकिन भारत में पोलियो नियंत्रण कार्यक्रम में पाक क्रिकेट खिलाड़ी इंजमाम ने भी भूमिका निभाकर रिश्तों में मिठास घोलने का प्रयास किया। आम लोगों के बीच संदेश पहुंचाने के लिए नारे बदले गए तो बैनर पोस्टर के रंग भी।
पोलियो कार्यक्रम को असफल होते देख केंद्र सरकार और यूनिसेफ ने सेलेब्रिटी का सहारा लेने का निर्णय लिया। हर उम्र के लोगों के बीच मशहूर अमिताभ बच्चन ने इस कार्यक्रम में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी निभाई। उन्होंने दो बूंद जिंदगी का संदेश देकर न सिर्फ माता-पिता का दिल जीता, बल्कि बच्चे भी काफी प्रभावित हुए। सरकार ने पांच साल तक के सभी बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाने की घोषणा अमिताभ बच्चन के इस संदेश से की कि ‘दो बूंद जिंदगी की, पिलाइए हर बार’। यात्रा पर जाने वालों को सजग करने के लिए अमिताभ ने कहा कि ‘रहो कहीं भी, कहीं भी जाओ, पोलियो खुराक हर बार पिलाओ’।
26 जून 2010 को अमिताभ का नारा था ‘पूरा तभी आपका प्यार, जब मिले बच्चे को पोलियो खुराक हर बार’। महिलाओं को आकर्षित करने के लिए अभिनेत्री प्रीति जिंटा, रानी मुखर्जी, एश्वर्या राय, प्रियंका चोपड़ा का सहारा लिया गया तो उम्र दराज जया बच्चन बच्चन ने भी महिलाओं को कर्तव्य बोध कराया। मुसलिमों के बीच पोलियो खुराक के प्रति फैले भ्रम को दूर करने के लिए इमामों का सहारा लिया गया। सलमान खान, आमिर खान, सोहा अली खान, कादर खान ने भी लोगों से पोलियो ड्राप पिलाने की अपील की। फारूख शेख और मनोज तिवारी जैसे क्षेत्रीय गायकों ने भी पोलियो कार्यक्रम को कभी नजरअंदाज नहीं किया।
शहर से लेकर गांवों तक क्रिकेट का बुखार चढ़े रहने को भी भुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई। सौरभ गांगुली, महेंद्र सिंह धोनी, हरभजन सिंह, यूसुफ पठान, वीरेंद्र सहवाग, एस रैना, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़, ब्रेट ली जैसे महान खिलाड़ियों ने बॉल आउट पोलियो कार्यक्रम में बल्ला चलाया और गेंदबाजी की। किसी भी संदेश को लोगों तक पहुंचाने में रंगों का चुनाव भी महत्वपूर्ण होता है। रंग चटकदार हो तो संदेश लोगों की नजर से बच नहीं सकता, इसलिए पीले, नीले व मजेंटा रंगो का उपयोग बैनर, पोस्टर और विज्ञापनों में किया गया। फिर अखबारों में आए दिन मुसलिम धार्मिक नेता पोलियो अभियान में शामिल होने की फोटो छपती थी। इससे आम मुसलमानों में भरोसा बढ़ा। इसीका नतीजा है कि हम गर्व से कह सकते हैं भारत हो गया है पोलियो फ्री।












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