खुर्शीद के बाद जायसवाल भी आचार संहिता के घेरे में

shriprakash jaiswal
यूपी में कांग्रेस को बहुमत न मिलने पर राष्ट्रपति शासन लगाने संबंधित बयान पर केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल फंसते जा रहे हैं। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बाद अब केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल भी आचार संहिता उल्लंघन के घेरे में आ गए हैं। राष्ट्रपति शासन लगने संबंधी बयान पर एतराज जताते हुए चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी कर सोमवार 27 फरवरी को दोपहर तक सफाई देने को कहा है।

बेनी की सुनवाई भी उसी शाम दोनों पक्षों की मौजूदगी में होगी। आयोग ने जायसवाल के बयान की सीडी और कानपुर के जिलाधिकारी की रिपोर्ट मंगाई थी। शुक्रवार को रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग ने देर रात नोटिस जारी कर जायसवाल को 27 फरवरी को दोपहर दो बजे तक स्पष्ट करने को कहा है कि उनके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के मामले को लेकर क्यों न कार्रवाई की जाए। आयोग ने प्रथम दृष्टया माना है कि जायसवाल ने यह बयान देकर छठे और सातवें चरण वाले जिलों के मतदाताओं को धमकाने का काम किया है कि वे या तो कांग्रेस को वोट दें या यूपी में राष्ट्रपति शासन का सामना करने को तैयार रहें।

आयोग के मुताबिक केंद्रीय मंत्री का यह बयान आदर्श आचार संहिता के पैरा एक (चार) का उल्लंघन है। इसमें कहा गया है कि ‘सभी दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे सभी कायों से ईमानदारी के साथ बचना चाहिए, जो निर्वाचन विधि के अधीन ‘भ्रष्ट आचरण’ और अपराध हैं। जैसे कि मतदाताओं को रिश्वत देना, मतदाताओं को अभित्रस्त करना आदि।’ इससे पहले, प्रदेश की संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि आयोग को कानपुर के जिलाधिकारी की ओर से भेजी गई सीडी और रिपोर्ट भेज दी गई है।

आयोग ही इस पर अंतिम कार्रवाई करेगा। बता दें कि जायसवाल के गुरुवार को कहा था कि कांग्रेस का बहुमत आ रहा है और यदि कुछ सीटें कम रह जाती हैं तो राष्ट्रपति शासन लगेगा। विपक्ष ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन, असंवैधानिक व लोकतंत्र विरोधी बयान करार दिया था। इसी के बाद चुनाव आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी से बयान की सीडी और रिपोर्ट भेजने को कहा था। हालांकि जायसवाल ने बाद में अपने बयान से मुकर गए थे। इधर बेनी का मामला भी सोमवार तक टल गया है। शिकायतकर्ता और भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन के आग्रह पर शुक्रवार को होने वाली सुनवाई सोमवार की शाम को होगी।

ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुस्लिम आरक्षण बढ़ाने के बयान पर घिरे बेनी के आचरण पर आयोग ने पहले ही अपनी सख्त आपत्ति जता दी थी। बेनी ने आग्रह किया था कि कोई फैसला लेने से पहले उन्हें सुनवाई का एक मौका दें। इसके लिए शुक्रवार तय किया था। सुनवाई के दौरान शाहनवाज को भी मौजूद रहना था। लेकिन बाद में उनके आग्रह पर सुनवाई की तिथि सोमवार तक बढ़ा दी गई है। गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के अधिवक्ता भी मौजूद होते हैं।

उनकी दलील सुनने के बाद आयोग अपना निर्णय लेता है। वैसे यह तय माना जा रहा है कि बेनी को कम से कम आचार संहिता उल्लंघन का दोषी करार दिया जाएगा। जबकि, भाजपा की ओर से कुछ कठोर निर्णय लेने के लिए दबाव बनाया जाएगा। गौरतलब है कि कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के मामले में आयोग ने राष्ट्रपति को भी पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। राष्ट्रपति ने कार्रवाई के लिए उस पत्र को प्रधानमंत्री को भेज दिया था।

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