जींद: रैंप पर भैंसों ने किया कैटवॉक, खूब लूटी वाह-वाही

Murrah Buffaloes
जींद। केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की मांग पर भैंसों की विश्व प्रसिद्ध मर्राह नस्ल के विस्तार एवं विकास परियोजना के लिए केन्द्र सरकार की ओर से हरियाणा को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। पवार आज जींद के अर्जुन स्टेडियम में हरियाणा पशुपालन डेयरी विभाग द्वारा आयोजित उच्च कोटि मुर्राह प्रोत्साहन राशि वितरण समारोह तथा गैर सरकारी संगठन जेके ट्रस्ट द्वारा राज्य में संचालित ग्राम योजना के घर द्वार कृत्रिम गर्भाधान सेवा के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर अपनी तरह के पहले 'मुर्राह आन रैम्प' कार्यक्रम का भी आयोजित किया गया, जिसमें उच्च कोटि की मुर्राह नस्ल की भैंस तथा झोटों का प्रदर्शन किया गया और भैंसों ने रैंप पर कैटवॉक किया। इस अवसर पर श्री शरद पवार तथा हुड्डा ने मुर्राह भैंसों के 11500 दुध उत्पादकों को सर्वाधिक दूध उत्पादकता के आधार पर कुल 8.22 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की। मुर्राह भैंस को हरियाणा की दौलत बताते हुए शरद पवार ने कहा कि हरियाणा की खेती व मेहनतकश किसानों की देशभर में चर्चा होती है।

उन्होंने कहा कि किसानों की खुशहाली के लिए उपजों के मूल्यों में सुधार करने की आवश्यकता है। इसके साथ-साथ उन्होंने ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि ब्राजील में कृषि गेंहू,गन्ना व फलों के उत्पादन में नाम कमाया है और वहां पर उन्होंने अपने दौरे के दौरान टेलिविजन पर गायो को रैम्प पर देखा था और आज मुझे जींद में मुर्राह नस्ल की भैंसों को रैम्प पर देखने का मौका मिला है।

उन्होंने कहा कि मुर्राह नस्ल को किसनों की समृद्धि के लिए देश के हर गांव में पहुंचाने तथा विश्व में भी इस पहुंचाने के लिए बलदेने की आवश्यकता है ताकि किसान नया कारोबार कर सकें और देश के बच्चों को मुर्राह नस्ल का दूध एक पौष्टिक आहार के रूप में उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि देश की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और 80 प्रतिशत में से 60 प्रतिशत किसानों के लिए सिंचाई के पानी के पर्याप्त प्रबंध नहीं है। इसकी और हमे ध्यान देने की आवश्यकता है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने मुर्राह को किसानों के लिए 'काला सोना' बताया। उन्होंने कहा कि मुर्राह भैंस के सम्मान में 'मुर्राह आन रैम्प' कार्यक्रम एक अनूठा कार्यक्रम है और वे उम्मीद करते है कि ऐसा कार्यक्रम आने वाले समय में जिला स्तर पर भी देखने को मिलेगा। उन्होंने पशुधन नस्ल सुधार कार्यक्रम के लिए जे.के. ग्रुप के अध्यक्ष विजयपत सिंघानिया का आभार जताया।

उन्होंने कहा कि उनके ट्रस्ट ने एक वर्ष की अवधि के इस कार्यक्रम को महज 5 महीनों में आरंभ कर दिखाया है, जहां आज प्रदेश के 21 जिलों में 1145 केन्द्रों के माध्यम से घर द्वार पर कृत्रिम गर्भाधन सेवा उपलब्ध करवा रहा है और यह कार्यक्रम हरियाणा में पशुधन विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। किसानों के विकास में यह एक नया आयाम स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व में दूध का सर्वाधिक उत्पादन भारत में होता है परन्तु प्रति पशुधन दूध की उत्पादकता कम है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के लिए यह गौरव की बात है कि प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में हरियाणा 680 ग्राम के साथ देश में प्रथम स्थान पर है जबकि राष्ट्रीय दर 262 ग्राम प्रति व्यक्ति की है।

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