शिक्षा मंत्री ने प्राईवेट स्कूलों को दी चेतावनी
रोष मार्च प्रदर्शन में लंबी कतारों के चलते लगभग 1 घंटा जीटी रोड पर ट्रैफिक भी बाधित रहा। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष श्योराण, उपाध्यक्ष भारतभूषण मिढ़ा, संरक्षक विजय निर्मोळी, महासचिव बलदेव सैनी, प्रदेश प्रवक्ता विनय वर्मा, जिला महासचिव शैलेन भास्कर, जिला प्रधान गुलाब सिंह सूंडा, परीक्षित बिश्नोई, सुशील बंसल, रमेश सैनी ने किया। सुभाष श्योराण ने कहा कि यदि शीघ्र ही अन्यायकारी तथा प्राइवेट स्कूलों के बच्चों पर बोझ डालने वाली धारा 134 ए को रद्द नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदेश संरक्षक विजय निर्मोही ने कहा कि धारा 134 ए धारा निरस्त न हुई तो इस सांकेतिक बंद के साथ ही एक सप्ताह के लिए प्रदेश स्तरीय बंद किया जाएगा।
हिसार में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए कहा गया कि हरियाणा शिक्षा अधिनियम की धारा 134-ए अगर वर्तमान रूप में लागू होती है तो प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे सामान्य बच्चों के अभिभावकों पर स्कूलों की सामान्य फीस बढ़ोतरी के अलावा 33 प्रतिशत अधिक फीस की बढ़ोतरी का बोझ उठाना पड़ सकता है। ऐसे में आम आदमी के जेब से उनके बच्चे की पढ़ाई के लिए जेब खर्च और अधिक हो जाएगा, जो प्राइवेट स्कूल संचालक नहीं चाहते। ज्ञापन सौंपने से पहले जिले के प्राइवेट स्कूल संचालक क्रांतिमान पार्क में इकठ्ठे हुए। यहां से वे जिला उपायुक्त कार्यालय में गए।
उन्होंने बताया कि उनका मकसद हर बच्चे को शिक्षित बनाना है। उसे आज के प्रतियोगी युग में सक्षम बनाकर उसके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करना है। इस कड़ी में सरकार ने जो शिक्षा अधिनियम की धारा 134-ए को वर्तमान रूप में लागू करना न्यायसंगत नहीं है। ऐसे में वे भले ही 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे दें, मगर उन 25 प्रतिशत बच्चों को शिक्षित करने में जो खर्च स्कूल प्रशासन पर पड़ेगा।
स्कूल इस खर्च के अतिरिक्त बोझ को किसी न किसी रूप में अभिभावकों से ही लेने को मजबूर होगा। सरकार इस धारा को लागू करना चाहती है तो वह सरकारी स्कूलों में लागू करे। उन्होंने कहा कि सरकार इस धारा को लागू करने की जिद पर रहती है तो सरकार उनको आर्थिक रूप से मदद भी करे। उन्होंने कहा कि आज किसी भी निजी स्कूल को सरकार की तरफ से आर्थिक मदद नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी मांग को पूरा नहीं करती तो उन्हें मजबूर आंदोलन का रुख करना होगा, जिसकी रणनीति सरकार की तरफ से जवाब मिलने के बाद की जाएगी।













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