यूपी का अंतिम फैसला मुस्लिम मतदाताओं के हाथ में

प्रदेश का पश्चिमी हिस्से का कुछ भाग, रुहेलखण्ड और तराई क्षेत्र में आने वाले विधानसभा सीटों का फैसला इस चरण के मतदान में होगा। सांतवें चरण में बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, ज्योतिबाफूले नगर, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, भीमनगर जिलों में मतदान होना है। इनमें में से ज्यादातर जिलों में मुस्लिम आबादी अधिक है।
चुनाव में समाजवादी पार्टी के मुस्लिम नेता आजम खां, बसपा के सफीकुर्रहमान बर्क और मुनकाद अली, कांग्रेस के राशिद मसूद और सलीम शेरवानी, भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी समेत कई मुस्लिम नेताओं की अग्निपरीक्षा होगी। इन तमाम राजनीतिक दलों के मुस्लिम नेताओं में से सिर्फ सपा से आजम खां ही प्रदेश की रामपुर सीट से चुनाव मैदान में हैं। पिछले चुनाव में मुसलमानों की पार्टी के नाम से जानी जाने वाली समाजवादी पार्टी के हाथ सिर्फ 16 सीटें लगीं थी। भाजपा को 8, कांग्रेस को 1 और डी.पी. यादव की राष्ट्रीय परिवर्तन दल को 2 सीटें मिलीं थी।
पिछले लोकसभा चुनाव में मुरादाबाद सीट से कांग्रेस उम्मीदवार और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्ïदीन, शहजहांपुर की धौरहरा सीट से केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और लखीमपुर खीरी सीट से जफर अली नकवी के जीत जाने से कांग्रेस की भी स्थिति प्रदेश के इस हिस्से में काफी मजबूत हुई है। प्रदेश के पश्चिमी हिस्सें में अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिये इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने चौधरी अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल से गठबंधन कर रखा है।
रालोद को इस गठबंधन से प्रदेश में कांग्रेस के मुस्लिम वोटरों की दरकार है। वहीं इस चुनाव में सबकी निगाहें रामपुर विधानसभा सीट पर भी टिकी हुईं होगी। इस सीट पर सपा उ मीदवार आजम खां की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। जिन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में सपा के खिलाफ बागी तेवर अख्तियार कर रखे थे और उस समय रामपुर से सपा प्रत्याशी और वर्तमान सांसद जया प्रदा की पुरजोर मुखालफत की थी।
जया प्रदा ने बाद में अमर सिंह के साथ सपा छोड़कर अपनी अलग राजनीतिक दल राष्ट्रीय लोकमंच का गठन कर लिया था। भाजपा के वरिष्ठï नेता मुख्तार अब्बास नकवी भी रामपुर के हैं जिस वजह से उनकी लोकप्रियता का भी परीक्षण इसी चरण के चुनाव में हो जाएगा। इसके अलावा भाजपा के युवा नेता वरुण गांधी को भी इस चुनाव में अपनी लोकप्रियता का प्रमाध देना होगा। उनके संसदीय क्षेत्र पीलीभीत और उनकी मां मेनका गांधी का आंवला में जनता के बीच अच्छी -खासी पकड़ है।
बसपा ने अन्य दलों की अपेक्षा प्रदेश में सबसे अधिक 88 सीटों पर मुस्लिमों को प्रत्याशी बनाया है। यही वजह है कि जहां बसपा का मुस्लिम प्रत्याशी है या जहां बसपा सबसे मजबूत स्थिति में है, मुस्लिम वोट के वहां बसपा में जाने की पूरी संभावना दिख रही है। इसी कारण अन्य बड़े राजनीतिक दलों का प्रदेश में समीकरण बिगड़ सकता है।












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