यूपी चुनाव के चौथे चरण की सीटवार समीक्षा

यहां हम बात करेंगे कि चौथे चरण की किस सीट पर पिछले वर्षों में क्या रुझान रहा। इन सीओं पर 2002 और 2007 के चुनावों के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में यहां क्या फर्क दिखाई दिया। जिससे आपके इस साल की जीत का अंदाजा हो सकता है।
155. शाहबाद – यहां पर 50 से 60 प्रतिशत मतदान हमेशा रहा है। इस सीट पर भाजपा और सपा का कब्जा रहा है। 2009 में यहां सपा को अच्छी संख्या में वोट मिले थे।
156. हरदोई – यहां पर 50 प्रशित मतदान आम है। यह नरेश अग्रवाल का गढ़ माना जाता है। 2009 में भी सपा को ही यहां से बढ़त हांसिल हुई थी, लिहाजा इस चुनाव में भी सपा के जीतने की प्रबल संभावना है।
157. गोपामऊ (अनुसूचित जाति) – इस नई सीट से 2009 में सपा आगे रही थी।
158. सांडी (अनुसूचित जाति) – यह पहले संडीला के अंतर्गत आती थी, जहां सपा का वर्चस्व था। यहां पर लोकसभा चुनाव में 60 फीसदी तक मतदान हुआ था। यहां पर भाजपा और बसपा के बीच कड़ी लड़ाई होती रही है, लेकिन इस बार सपा के आगे निकलने की संभावना है।
159. बिलग्राम मल्लावां – यहां पर 50 से 60 फीसदी मतदान होता रहा है। इस सीट पर सपा और भाजपा बारी-बारी से आती रही हैं। हालांकि 2009 में मिली बढ़त यहां पर सपा को जीत का संकेत दे रही है।
160. बालामऊ (अनुसूचित जाति) – इस सीट पर बसपा का वर्चस्व दिखाई दे रहा है। 2009 में यह पार्टी सबसे आगे रही थी।
161. संडीला - इस सीट पर भाजपा और बसपा बारी-बारी से रहे हैं। लेकिन मिश्रिख लोकसभा सीट पर यहां से बसपा को बढ़त साफ दर्शा रही है कि इस बार लड़ाई कांटे की होगी।
162. बांगरमऊ – यहां 50 फीसदी से ऊपर मतदान होता है। यह सीट बस्पा और सपा के खाते में जा चुकी है। लेकिन 2009 में मिली बढ़त के ग्राफ पर चलें तो इस बार यहां सपा का बोलबाला होगा।
163. साफीपुर (अनूसूचित जाति) – इस सीट पर भाजपा और सपा का कब्जा रहा है। 2009 में 50 फीसदी मतदान हुआ, जिसमें कांग्रेस सबसे आगे रही।
164. मोहान (अनुसूचित जाति) – यह नई सीट है, जिस पर कांग्रेस का ही बोलबाला है।
165. उन्नाव – यहां 40 फीसदी मतदान रहता है। यह सीट बसपा ने सपा से छीनी थी।
166. भगवंतनगर – यह सीट बसपा ने भाजपा से छीनी थी।
167. पुरवा – यहां सपा का गढ़ है और मतदान भी 60 फीसदी के करीब होता है।
168. मलिहाबाद (अनुसूचित जाति) – सपा का यहां वर्चस्व कई सालों से है। यही नहीं 2009 के लोकसभा चुनाव में भी यहां से सपा को अच्छी संख्या में वोट मिले थे।
169. बक्शी का तालाब – यह सीट सपा के गढ़ में आती है।
170. सरोजनीनगर – यहां 1993 में 60 फीसदी तक मतदान हुआ था। तब यह सीट बसपा ने सपा से छीनी थी।
171. लखनऊ पश्चिम – यहां पर पिछले कई वर्षों से भाजपा के लालजी टंडन का वर्चस्व रहा है। भाजपा के शासनकाल में टंडन को विकासपुरुष के नाम से बुलाया जाता था।
172. लखनऊ उत्तर – यह नई सीट है और यहां भाजपा का गढ़ है।
173. लखनऊ पूर्व – यहां भी भाजपा का गढ़ है। 2009 में भी यहां से भाजपा को सबसे ज्यादा वोट मिले थे।
174. लखनऊ मध्य – यहां भी भाजपा का बोलबाला है। यहां लोकसभा चुनाव में लालजी टंडन के रीता बहुगुणा जोशी को हराया था।
175. लखनऊ कैंट– यहां भी कहानी कुछ ऐसी ही है। यहां लालजी टंडन रीताबहुगुणा जोशी से 6000 मतों से पीछे रह गये थे।
176. मोहनलालगंज (अनुसूचित जाति) – यह सीट सपा से बसपा के खाते में गई। 2009 में यहां पर छोटे दल उभरे जो इस चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
177. बछरावां (अनुसूचित जाति) – यहां पर 50 से 60 फीसदी मतदान होता रहा है। यहां सोनिया गांधी को मानने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है, लिहाजा कांग्रेस को फायदा मिल सकता है।
178. तिलोई – यहां पर 50 फीसदी तक मतदान होता रहा है। राहुल गांधी के गढ़ में कांग्रेस के अलावा किसी की तूती नहीं बोलती।
179. हरचंदपुर– इस सीट पर भी सोनिया गांधी का प्रभाव ज्यादा है।
180. रायबरेली – कांग्रेस के गढ़ में हमेशा से कांग्रेस को ही वोट ज्यादा मिलते आये हैं। रायबरेली शहर में कांग्रेस ने तमाम विकास कार्य भी किये हैं, जिसका फायदा निश्चित रूप से मिलेगा।
181. सालोन (SC) – राहुल गांधी के गढ़ में कांग्रेस के विकास कार्यों की ही चर्चा होती है।
182. सरेनी – यहां पर भाजपा और बसपा की जंग होती आयी है। हालांकि लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी को सबसे ज्यादा वोट मिले थे।
183. ऊंचाहार – इस नई सीट पर सोनिया गांधी के प्रभाव से कांग्रेस को फायदा मिल सकता है।
192. कायमगंज (अनुसूचित जाति) – यहां पर पहले भी 60 फीसदी तक मदान होता रहा है। सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद को फायदा तभी मिलेगा, जब मुस्लिम उनका साथ देंगे।
193. अमृतपुर – यहां पर कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, लेकिन 2009 में सलमान खुर्शीद को उम्मीद से कम वोट मिले थे।
194. फरुखाबाद– यहां पर भाजपा के ब्रह्मदत्त द्विवेदी और सलमान खुर्शीद का वर्चस्व है। लिहाजा भाजपा और कांग्रेस की कड़ी टक्कर होगी।
195. भोजपुर – यहां भी सलमान खुर्शीद के प्रभाव से कांग्रेस के खाते में वोट गिर सकते हैं। (
196. छिबरामऊ– 1993 में यहां 61 फीसदी मतदान हुआ था। यह सीट कभी सपा तो कभी भाजपा के पास रही है। 2009 में लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव को भारी मत मिले थे, जिसका फायदा सपा को अब मिल सकता है।
197. तिरवा – इस सीट पर भी अखिलेश यादव का भी प्रभाव दिखाई दे सकता है।
198. कन्नौज (अनुसूचित जाति) – यह सीट तो सपा के पास है, जो पहले भाजपा के पास थी, लेकिन उपचुनाव में सपा को मिली हार के कारण इस बार संकट मंडरा रहा है।
232. टिंडवाड़ा – यह सीट सपा ने बसपा से छीनी थी। हालांकि 2009 में सपा को अच्छी संख्या में वोट मिले थे, लिहाजा एक बार फिर यह सीट सपा के खाते में आ सकती है।
233. बबेरू – बसपा और भाजप की लड़ाई में यहां किसी को भी फायदा मिल सकता है।
234. नारायनी (अनुसूचित जाति) – बाबू लाल कुशवाहा के गढ़ में इस बार भाजपा को फायदा मिल सकता है।
235. बांदा – यहां भी बाबू लाल कुशवाहा को मानने वाले लोग ज्यादा हैं। लिहाजा सीट भाजपा के खाते में जा सकती है।
236. चित्रकूट – यहां पर समाजवादी पार्टी का गढ़ है, लिहाजा किसी और की बात करना उचित नहीं होगा।
237. मानिकपुर– यह सीट बसपा ने भाजपा से छीनी थी। लेकिन 2009 में सपा को अच्छी संख्या में वोट मिले थे। लिहाजा अब सपा आ सकती है।
238. जहानाबाद – यहां पर 1996 में 62 प्रतिशत तक मतदान दर्शाता है कि यहां के मतदाता काफी जागरूक हैं। पार्टी की बात करें तो सपा को सीट मिल सकती है।
239. बिंदकी – यह सीट भाजपा ने बसपा से छीनी लेकिन अपना वर्चस्व कायम नहीं रख सकी है। इस बार सपा आगे आ सकती है।
240. फतेहपुर – यह सीट बसपा ने भाजपा से छीनी, लेकिन यहां भी 2009 में सपा का बोलबाला रहा।
241. आयाह शाह – इस सीट पर सपा का गढ़ माना जाता है। लेकिन परिणाम मुस्लिम मतदाताओं के हाथ में ज्यादा रहेगा।
242. हुसैनगंज – सपा के गढ़ में दूसरों की दखलअंदाजी बढ़ गई है, लिहाजा कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
243. खागा (अनुसूचित जाति) – 1993 में यहां 60 प्रतिशत मतदान हुआ। यह सीट बसपा ने सपा से छीनी, लेकिन 2009 में बसपा का प्रदर्शन काफी खराब रहा।
244. रामपुर खास – प्रमोद तिवारी के गढ़ में कांगेस की जीत हो सकती है।
245. बाबागंज (अनुसूचित जाति) – यहां पर सपा ने 2009 में सबसे ज्यदा वोट प्राप्त किये थे। लिहाजा उसकी जीत संभव है।
246. कुंडा – रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की सीट पर किसी और का आना काफी मुश्किल है।
247. विश्वनाथ गंज – इस नई सीट पर 2009 में कांग्रेस को सबसे ज्यादा वोट मिले थे।
248. प्रतापगढ़– यहां पर सपा और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है। हालांकि कांग्रेस भी आगे आ सकती है।
249. पट्टी – यह सीट भाजपा से छिन गई, जिसके बाद यहां बसपा ने वर्चस्व कायम करने की कोशिश की।
250. रानीगंज– यहां पर बसपा का गढ़ है, लिहाजा पार्टी को फायदा मिल सकता है।
यह समीक्षा ब्लॉग स्टम्प्ड ऑफ से अनुवादित है।












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