आयोग के पास रहेगा आचार संहिता का अधिकार- सिब्बल
चर्चा ने जोर पकड़ा कि आचार संहिता के उल्लघंन पर कार्रवाई का अधिकार निर्वाचन आयोग से लेकर अदालत को दिया जाय। सिब्बल ने कहा कि नौकरशाही कई मामलों में अपने विचार और सुझाव देती है लेकिन मंत्रियों के समूह में उन पर सहमति जताई जाय ऐसा नहीं होता। उन्होंनें कहा कि उनके संज्ञान में यह बात नहीं है कि आचार संहिता के उल्लघंन में कार्रवाई का अधिकार निर्वाचन आयोग से ले लिया जाय।
मालूम हो कि राहुल गांधी पर आचार संहिता के उल्लघंन का आरोप लगने के बाद यह बात समाने आयी थी कि केन्द्र सरकार इस मामले में प्रस्ताव कर सकती है कि आचार संहिता के उल्लघंन मामले को कानून के दायरे में लाकर कार्रवाई का अधिकार अदालत को दिया जाय। कांग्रेस के कई नेताओं ने इसे चुनाव सुधार की दिशा में एक कदम बताया है कि जबकि विपक्ष ने यह कह कर इसकी आलोचना की है कि इसके लिये समय गलत चुना गया है।
सिब्बल ने कहा कि कानपुर में पार्टी महासचिव राहुल गांधी के रोड शो मामले में पुलिस ने प्रारंभिक जानकारी लिये बिना तेजी से कार्रवाई की जो गलत है। इस तरह के संवेदनशील मामले में पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के पहले शुरूआती जानकारी लेनी चाहिये थी। केन्द्रीय मानव संसाधन और संचार मंत्री ने कहा कि वह खुद एक वकील हैं और पार्टी यह महसूस करती है कि इसके पीछे कुछ राजनीतिक ताकते हैं।
उन्होंने कहा कि कानपुर जिला प्रशासन ने 17 फरवरी को 35 किलोमीटर के रोड शो की अनुमति दी थी लेकिन शो शुरू होने के कुछ घंटे पहले ही इसमें कटौती का आदेश जारी कर दिया गया। पार्टी ने 23 फरवरी को मतदान होने के कारण जनता को रोड शो के बारे में जानकरी दे दी थी। केन्द्रीय मंत्री ने नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर (एनसीटीसी) का भी बचाव किया और कहा कि कुछ राज्य सरकारों का विरोध बेमतलब है। उन्होंने बसपा के बीस नेताओं की सूची भी जारी की जिनपर पिछले पांच साल में मुकदमें दर्ज कराये गये हैं।













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