अपने ही घर में फंसे मुलायम सिंह यादव

लखनऊ। सरकार बनाने का दावा कर रहे समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव अपने ही घर में फंसते नजर आ रहे हैं। इटावा में मुलायम की मुश्किल ही मुख्‍य वजह यह भी है कि यहां बसपा जहां कड़ी टक्कर दे रही है वहीं कांग्रेस भी मजबूत दावेदारी पेश कर रही है। जिले में विधानसभा की तीन सीटों में से दो पर बसपा का ही कब्जा है, जबकि एक पर मुलायम सिंह यादव भाई शिवपाल सिंह यादव विधायक हैं।

जिले की जसवन्तनगर सीट से मुलायम 1967 से 1993 तक सात बार विधायक चुने गये। इसके बीच में वह केवल दो बार 1969 और 1980 में हारे थे। वर्ष 1980 में इन्दिरा गांधी की लहर में कांग्रेस के बलराम सिंह यादव से और 1969 में निर्दलीय विश भर सिंह यादव से चुनाव हार गये थे। वर्ष 1997 से इस सीट से लगातार शिवपाल सिंह यादव विधायक हैं। मौजूदा चुनाव में बसपा और कांग्रेस प्रत्याशी सजातीय होने के बावजूद शिवपाल सिंह यादव अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहे हैं।

वह अपने क्षेत्र को विकास के माडल के रुप में विकसित करने का आश्वासन दे रहे हैं। जसवंतनगर के शाक्य बिरादरी में अच्छी खासी पकड़ बना चुके राकेश फौजी का टिकट काटकर बसपा ने मनीष यादव, को प्रत्याशी बनाया। टिकट कटने के बाद बसपा के इस क्षेत्र के कद्दावर नेता श्री फौजी बसपा से भाजपा में चले गये। जसवंतनगर से कांग्रेस प्रत्याशी अजय यादव पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के प्रभावशाली नेता रहे बलराम सिंह यादव के बेटे नामांकन के साथ ही अपने एक पारिवारिक विवाद में उलझकर जेल में हैं।

मुलायम सिंह यादव के सामने उनकी राजनीतिक ताकत नहीं के बराबर मानी जा रही है। भाजपा ने जसवंतनगर विधानसभा सीट पर प्रत्याशी के रुप में राकेश पाल को उतारा है। बसपा से रुठकर आए फौजी भाजपा के पार परिक मतों के सहारे वह चुनावी समर में अपने हाथ पैर मार रहे हैं। जिले की दूसरी विधानसभा सीट इटावा सदर पर चल रहा चुनावी घमासान को यहां उतरे विभिन्न दलों के प्रत्याशियों ने काफी रोमांचक बना दिया है। बसपा विधायक महेंद्र राजपूत जीत की हैट्रिक बनाने के लिये पूरी ताकत से चुनाव में लगे हुये हैं सपा ने उन्हें शिकस्त देने के लिए दो बार सांसद रहे रघुराज सिंह शाक्य को प्रत्याशी बनाया है।

भाजपा ने यहां ब्राह्मणों में लोकप्रिय माने जाने वाले अशोक दुबे को अपना प्रत्याशी बनाया है। इटावा सदर सीट के पारपट्टी के ठाकुर बाहुल्य इलाके में लगभग सभी दल मतदाताओं को विभाजित करने में जुटे हैं। इटावा शहर के अंसारी बिरादरी के वोट बैंक में पीस पार्टी के संस्थापक डा. अयूब के माध्यम से सेंध लगाकर सदर सीट के राजनीतिक घमासान को पीस पार्टी रोमांचक बनाने का काम कर रही है। जिले की तीसरी और नए परिसीमन के बाद सुरक्षित बना दी गई भरथना विधानसभा सीट पर भी मुकाबला इतना कठिन है कि कुछ भी कह पाने की स्थिति में कोई नही है।

सपा ने पूर्व विधायक सुखदेवी वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। इटावा में राजनीतक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए जहां सपा नेता और पार्टी महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव तथा नेता प्रतिपक्ष शिवपाल सिंह यादव लगातार जनसंपर्क और सभाओं का सिलसिला तेज किए हुए हैं वहीं मुख्‍यमंत्री मायावती और बसपा के वरिष्ठ नेता सतीश मिश्रा यहां चुनावी दौरा कर गए हैं। सपा के दुर्ग समझे जाने वाले इस जिले में किसका वर्चस्व बढ़ेगा और किसका घटेगा ये तो नतीजे ही बताएंगे। इटावा में पांचवे चरण में 23 फरवरी को मतदान होगा।

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