कांग्रेस शासित प्रदेशों में आजादी के 64 साल बाद भी छुआछूत: माया

Maya
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने हरियाणा राज्य में हिसार जिले के दौलतपुर गांव में हुई छुआछूत की सनसनीखेज, वीभत्स एवं दु:खद घटना की कड़ी निन्दा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनायें भारतीय समाज पर कलंक हैं। उन्होंने इसे जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि इस घटना की जितनी भी भत्र्सना एवं निन्दा की जाये, कम है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित हरियाणा में आजादी के 64 साल बाद भी छूआछूत के आधार पर एक दलित युवक का हाथ काटा जाना बेहद शर्मनाक है।

गौरतलब है कि हरियाणा के दौलतपुर गांव में एक सवर्ण किसान के बेटे ने उसके खेत में रखे मटके से पानी पीने पर दलित युवक राजेश का हाथ दरांत से काट दिया। राजेश सनियाणां गांव का रहने वाला है और दौलतपुर में रोजी-रोटी की तलाश में काम करने गया था। काम करने के दौरान, जब उसे प्यास लगी तो उसने वहीं रखे एक मटके से पानी पी लिया। खेत के मालिक के बेटे ने उसकी जाति पूछी और राजेश द्वारा खुद को दलित बताये जाने पर, साइकिल की दरांत से हमला कर दिया, जिससे राजेश का हाथ कट गया।

बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि इस घटना से स्पष्ट हो जाता है कि आज भी कांग्रेस शासित राज्यों में दलितों की स्थिति कितनी बदतर है और उनके साथ किस प्रकार का व्यवहार हो रहा है। उन्हें न तो समुचित सुरक्षा मिल रही है और न ही उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इसके साथ ही न ही उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थिति ही मिल पा रही है। इसी का परिणाम है कि दलित युवक अभी भी खेतों में जाकर मजदूरी का काम करने पर मजबूर हैं।

बीएसपी अध्यक्ष ने कहा कि इस दु:खद घटना ने कांग्रेस युवराज के उन ढकोसलों की भी पोल खोल दी है, जिसमें वे दलितों के घरों में जाकर खाना खाने और पानी पीने का नाटक करते आये हैं और जमीनी राजनीति करने का दावा करते हैं। जबकि हकीकत यह है कि कांग्रेस शासित राज्य में हुई इस प्रकार की घटना इस बात को दर्शाती है कि कांग्रेस शासित राज्यों में दलित-शोषित वर्ग को न तो आजादी से जीने के अवसर मिल रहे हैं और न ही सामाजिक न्याय। यहां वे लोग आज भी न्याय से पूरी तरह वंचित हैं।

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि युवराज सहित कांग्रेस के बाकी सभी शीर्ष नेताओं का सिर हरियाणा की इस घटना से शर्म के मारे झुक जाना चाहिये। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने दलित विरोधी मानसिकता के चलते इस शर्मनाक घटना की निन्दा तक करना मुनासिब नहीं समझा। बीएसपी अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता की तरह इन दिनों उत्तर प्रदेश में चुनावी प्रचार में व्यस्त हैं। उन्होंने हरियाणा में हुई इस दु:खद घटना पर न तो कोई संवेदना व्यक्त की और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई की, जबकि वे स्वयं उसी राज्य के रहने वाले हैं।

एक संवैधानिक पद पर होते हुए भी वे पार्टी के लिए खुले आम काम कर रहे हैं। उन्हें इस घटना पर अफसोस भी जाहिर करना चाहिए था और शर्म भी आनी चाहिये थी क्योंकि वे आयोग के अध्यक्ष हैं। इस घटना की जिम्मेदारी को लेते हुए उन्हें आयोग के अध्यक्ष पद से नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिये। माया ने कहा कि पुनिया हरियाणा के रहने वाले हैं और जब उन्हें यहां अपने लिए राजनीतिक जमीन नहीं मिली, तो वे उत्तर प्रदेश में छद्म राजनीति करने लगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक नौटंकी करने के बजाए पुनिया को हरियाणा में रहकर वहां राजनीतिक नौटंकी करनी चाहिए, जहां आज भी दबंगों द्वारा दलितों, शोषितों और पीडि़तों के साथ अन्याय और अत्याचार हो रहे हैं।

इसके साथ ही हरियाणा में आज भी आए दिन अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार के साथ ही आनर किलिंग की सबसे अधिक घटनायें घटित हो रही हैं, जो गम्भीर सामाजिक अभिशाप है। लेकिन राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री पुनिया नेऐसी घटनाओं पर कभी भी संवेदनशीलता नहीं दिखायी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुनिया, जो स्वयं भी दलित वर्ग से आते हैं और अपने को दलितों के हितैषी नेता बताते हैं। पुनिया का यह दिखावापन केवल खोखली राजनीति का प्रतीक है।

इसके साथ ही श्री पुनिया उत्तर प्रदेश के भोले-भाले अनुसूचित जाति के लोगों को गुमराह कर रहे हैं। मायावती ने कहा कि पुनिया ने उत्तर प्रदेश में एक प्रशासनिक जिम्मेदार अधिकारी के पद पर रहने के बावजूद प्रदेश में ऐसी कोई छाप नहीं छोड़ी, जिससे अनुसूचित जाति के लोगों को कोई फायदा मिला हो। उन्होंने पुनिया को एक अवसरवादी और चापलूस अधिकारी बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भी प्रदेश के विकास और कल्याण के लिये कोई सार्थक योगदान नहीं किया। एक राजनैतिक पार्टी में महत्वपूर्ण पद पर काबिज होने के बाद भी पुनिया में दलितों के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं है।

यही कारण है कि पुनिया के कारनामों को दृष्टिगत रखते हुए उनके मूल राज्य हरियाणा ने उन्हें कोई तव्वजो नहीं दी, तो वे उत्तर प्रदेश में गुमराह की राजनीति करने के लिए कूद पड़े। उन्होंने कहा कि अच्छा तो यही होता कि पुनिया उत्तर प्रदेश के स्थान पर हरियाणा में जाकर राजनीति करते और देश में सबसे अधिक अनुसूचित जाति के ऊपर हो रहे जघन्य अत्याचारों से वहां के इस वर्ग के लोगों को न्याय दिलाने में अपनी रचनात्मक ऊर्जा का उपयोग करते। उन्होंने कहा कि हरियाणा की इस घृणित घटना पर श्री पुनिया सहित कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को जवाब देना चाहिए कि दलितों के साथ आज भी ऐसे घृणित और वीभत्स घटनायें क्यों हो रहीं हैं और कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये कौन से प्रभावी कदम उठाये हैं ?

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