पुलिस हिरासत में मारे गए के आश्रितों को मिलेगा 5 लाख रुपए का हर्जाना

उल्लेखनीय है कि हरदेव सिंह की कालांवाली के रहने वाले डा. सोहन लाल सिंगला की कार पर ड्राइवर था। 1 जुलाई 1999 को वो लेट आया तो डा. सिंगला के लड़के ने लेट आने के लिए उसको डांटा। गुस्से में हरदेव सिंह डा. सिंगला की गाड़ी लेकर पंजाब चला गया। दर्शन सिंह हरदेव सिंह का मित्र होने के नाते गाड़ी में उसके साथ था। डा. सिंगला ने कार गुम होने की पोर्ट पुलिस स्टेशन कालांवाली में लिखवाई थी, जिसके कारण हरदेव सिंह व दर्शन सिंह कार समेत पकड़े गए, उन्हें पुलिस स्टेशन कालांवाली में हिरासत में रखा गया।
डा. सोहन सिंगला ने पुलिस स्टेशन कालांवाली में कार मिलने की खुशी में पुलिस अधिकारियों को जबरदस्त पार्टी दी और कहा कि मुजरिमों से 40,000 रुपए उसे दिलवाए जाएं और न मिलने की सूरत में दर्शन सिंह व हरदेव सिंह को इतना बुरी तरह से पीटा जाए ताकी जीवनभर के लिए वो शारीरिक रूप से नाकारा हो जाएं और इसके लिए पुलिस अधिकारियों को पार्टी व ईनाम दिया जाएगा।
पुलिस स्टेशन कालांवाली के एसएचओ सत नारायण व एएसआई रामचंद्र ने दर्शन सिंह व हरदेव को अमानवीय यातनाएं दीं। रातभर उन्होंने दर्शन सिंह को इतना पीटा की वह बेहोश हो गया। उसके गुप्तांग पर चोटें मारी व उसके अंडकोषों को अमानवीय ढंग से खींचा की दर्शन सिंह को हार्ट अटैक हो गया उसकी नाड़ी शून्य की ओर जाने लगी उसे सिविल अस्पताल सिरसा ले जाया गया जहां दर्शन सिंह ने दम तोड़ दिया। मरने से पहले उसने अपने से मिलने आए हुए अपने मित्र कमलजीत व मां छिंद्रपाल कौर को बता दिया था कि पुलिस ने उसे इतनी अमानवीय यातनाएं दी है कि वह जल्दी ही मर जाएगा और उसके दो घंटे बाद ही दर्शन सिंह की मृत्यु हो गई।
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश डा. नीलिमा शांगला ने दर्शन सिंह की पुलिस हिरासत में मौत का जिम्मेवार कालांवाली पुलिस स्टेशन के एसएचओ सतनारायण व एएसआई रामचंद्र तथा डा. सोहनलाल को ठहराया है जिसके उकसाने से दर्शन सिंह की पुलिस यातना से हत्या हुई। सतनारायण व रामचंद्र दोनों अधीनस्थ कर्मचारी हैं अपने कर्मचारियों की गलती के लिए जिम्मेवार है इसलिए हरियाणा सरकार को पांच लाख रुपए हर्जाना मृतक दर्शन सिंह के परिवार को देने का हुकम सुनाया है।
साथ ही 9 प्रतिशत ब्याज भी दिया जाएगा और हर्जाने की राशि दर्शन सिंह की मौत के जिम्मेवार डा. सोहन लाल सिंगला व कालांवाली पुलिस स्टेशन के एसएचआ सतनारायण व एएसआई रामचंद्र जो 6 जुलाई 1999 को पुलिस स्टेशन कालांवाली में नियुक्त थे तीन बराबर हिस्से में उसकी तनख्वाह, पेंशन, जायदाद से सरकार द्वारा वसूला जाएगा सरकार द्वारा। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. नीलिमा शांगला ने पुलिस हिरासत में दर्शन सिंह की मौत के जिम्मेदार उपरोक्त तीनों दोषियों सतनारायण, रामचंद्र व डा. सोहन लाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अंतर्गत तुरंत मुकदमा दर्ज करने का फैसला सुनाया है।












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