यूपी के तीसरे चरण की चुनावी समीक्षा

UP Elections
उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में 56 प्रतिशत वोटिंग हुई। यह वोटिंग वैसे तो अनुमान के मुताबिक है, लेकिन 60 फीसदी से कम मतदान यहां भी पहले व दूसरे चरण जैसी कहानी ही बयां कर रही है। अगर हम इतिहास के पन्‍ने पलट कर देखें तो यहां की कई सीटों पर कम मतदान परंपरा बना रहा है।

इस चरण में सबसे बड़ी लड़ाई सपा और बसपा के बीच है। यहां पर कुछ सीटें कांग्रेस व भाजपा के खाते में भी जाने की उम्‍मीद है। यहां पर हम बतायेंगे कि कैसे भाजपा ने यहां बसपा और सपा से हारी।

सीटवार विवरण इस प्रकार है-

184. जगदीशपुर (अनुसूचित जाति) – कम मतदान होना जैसे यहां की परंपरा सी है। इससे पहले 2002 को छोड़ कर कभी भी 35 प्रतिशत से अधिक मतदान नहीं हुआ। 2002 में 52 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2007 में 18 प्रतिशत तक गिर गये। हां 2009 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से राहुल गांधी को अच्‍छी संख्‍या में वोट जरूर मिले थे।

185. गौरीगंज – यहां भी जगदीशपुर जैसी ही कहानी है। 2002 में यहां 57 फीसदी मतदान हुआ था, जिसकी वजह से कांग्रेस को काफी फायदा मिला था।

186. अमेठी - यहां पर 38 प्रतिशत से लेकर 78 प्रतिशत तक मतदान के चलते यह सीट को भाजपा और कांग्रेस के खातों में जाती रही है। लेकिन विडंबना यह है कि यहां से राहुल गांधी को 20 हजार वोट कम मिले थे।

187. इसौली – 50 के दशक से लेकर आज तक यहां पर कई पार्टियों का राज रहा है।

188. सुल्‍तानपुर – इस सीट पर संजय सिंह का दबदबा रहा है और इस बार भी उन्‍हीं के समर्थित प्रत्‍याशी को अधिक वोट मिलने की संभावना है।

189. सदर – यहां पर भी संजय सिंह का ही दबदबा रहा है।

190. लंबुआ – यहां भी 2009 में संजय सिंह को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले थे।

191. कादीपुर (अनुसूचित जाति) – इस सीट पर भाजपा और बसपा में कड़ी टक्‍कर रही। यह सीट पिछले कई दशकों से इन्‍हीं दोनों पार्टियों के पास रही है।

251. सिराथु – यहां पर 30 से 40 प्रतिशत तक मतदान आम बात है, लेकिन 2002 में 50 प्रशित तक पहुंचा। 2009 में सपा को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले थे।

252. मंझनपुर (अनुसूचित जाति) – यहां पर भी सिराथु जैसी स्थिति है, लेकिन 2009 में यहां बसपा को अच्‍छी बढ़त हासिल हुई।

253. छैल – यहां पर 30 से 40 फीसदी के बीच मतदान होता आया है, लेकिन बीच में एक बार 50 प्रतिशत तक वोट पड़े। 2009 में सपा को अच्‍छे वोट मिले।

254. फाफामऊ– इस सीट पर 2009 में में बसपा मात्र 2000 वोटों से आगे रही। तब यहां पर 38 फीसदी मतदान रहा था।

255. सोराओं (अनुसूचित जाति) – यहां पर 50 प्रशित तक मतदान आम है। यह सीट बसपा और भाजपा के खाते में जाती रही हैं। 2009 में बसपा को 1000 वोट से बढ़त मिली थी।

256. फूलपुर - कांग्रेस का वर्चस्‍व रहा है, लेकिन 2009 में सपा को 4 हजार वोटों की बढ़त मिली थी।

257. प्रतापपुर – यहां पर 50 फीसदी तक वोट पड़ना सामान्‍य बात है। 2009 में यहां से सपा काफी कम मतों से जीती थी। S

258. हंडिया – यहां पर 50 से 60 फीसदी मतदान पड़ना आम बात है। समाजवादी पार्टी ने 2009 में यहां से 2000 वोटों की बढ़त बनायी थी।

259. मेजा – यह सीट कई वर्षों तक सीपीएम की रही। त2009 में यहां पर समाजवादी पार्टी को मिली बढ़त से इस साल सीपीएम के हारने की आशंका है।

260. करछाना – यहां पर 50 प्रतिशत मतदान आम है, यहां पर लंबे समय से सपा का बोलबाला है।

261. इलाहाबाद पश्चिम – यहां पर 30 से 40 प्रतिशत वोट ही गिरते हैं। यहां सपा, अपना दल और बसपा की जंग बड़ी है। 2009 में बसपा यहां 10 हजार वोटों से आगे रही थी।

262. इलाहाबाद उत्‍तर – यहां भी वोट का प्रतिशत तो लगभग यही रहता है, लेकिन जंग कांग्रेस और भाजपा के बीच होती है।

263. इलाहाबाद दक्षिण – प्रतिशत यहां भी उतना ही है, लेकिन यह भारतीय जनता पार्टी का गढ़ है। यहां पर केसरी नाथ त्रिपाठी का वर्चस्‍व है।

264. बारा (अनुसूचित जाति) – यहां पर कभी 50 प्रतिशत तो कभी 60 प्रतिशत मतदान पड़ता है। यह सीट कभी बसपा के तो कभी सपा के खाते में जाती रही है।

265. काराओं (अनुसूचित जाति) – इस सीट पर समाजवादी पार्टी का वर्चस्‍व है।

364. बदलापुर – बसपा यहां से 2009 में सबसे आगे रही।

365. शाहगंज – यहां पर 40 से 50 प्रतिशत तक वोट पड़े। बसपा यहां 2009 में आगे रही।

366. जौनपुर – 2009 में 46 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें बसपा सबसे आगे रही।

367. मलहानी – इस सीट पर बसपा का वर्चस्‍व रहा है।

368.मुंगरा बादशाहपुर – यहां भी बसपा का दबदबा रहा है।

369. मछलीशहर (अनुसूचित जाति) – यह सीट सपा और बसपा के खाते में जाती रही है, हालांकि 2009 में सपा को बढ़त हासिल हुई थी।

370. मरियाहू – इस सीट पर 50 प्रतिशत तक वोट गिरते हैं। यहां सपा ही कई वर्षों से आगे रही है।

371. जाफराबाद – इस सीट पर 2009 में बसपा को सिर्फ 2000 वोटों से बढ़त मिली थी।

372. केराकट (अनुसूचित जाति) – यहां पर मतदान का प्रतिशत काफी कम रहता है। 2009 में बसपा 5000 वोट से आगे रही थी।

380. मुगलसराय – यह सीट कभी भाजपा तो कभी सपा के खाते में रही है। हालांकि 2009 में सपा आगे रही थी।

381. सकलदिया – 2009 में इस सीट पर सपा प्रत्‍याशी 4000 वोटों से आगे रहा था।

382. सइयदराजा - 2009 में बसपा मात्र 3000 वोटों से आगे रही थी।

383. चकिया (अनुसूचित जाति) – यहां पर 50 प्रतिशत तक मतदान अमूमन होता है, लेकिन 2002 में यह 63 प्रतिशत तक पहुंच गई। यहां कभी सपा तो कभी बसपा का राज रहा है। हालांकि 2009 में बसपा को अच्‍छे वोट मिले थे।

384. पिंडरा – इस नई सीट पर 2009 में सपा 4000 वोटों से आगे रही थी।

385. अजगरा (अनुसूचित जाति) – इस सीट पर बसपा का वर्चस्‍व है।

386. शिवपुर – इस सीट पर 2009 में बसपा के प्रत्‍याशी को सबसे ज्‍यादा वोट मिले थे।

387. रोहानिया – 2009 में इस सीट पर बाहुबली मुख्‍तार अंसारी सांसद मुरली मनोहर जोशी से आगे निकल गये थे। वो भी मात्र 2000 वोट से।

388. वाराणसी उत्‍तर – पहले यहां अच्‍छी संख्‍या में वोट गिरता था, लेकिन 2002 में मात्र 30 प्रतिशत वोट पड़े। इस सीट पर भाजपा और सपा का कब्‍जा देखा गया है। 2009 में यहां मुरली मनोहर जोशी को करीब 2000 वोट कम मिले थे।

389. वाराणसी दक्षिण – 1996 और 2002 में यहां 30 प्रतिशत मतदान रहा. 2009 में भाजपा ने अच्‍छी बढ़त बनायीं।

390. वाराणसी कैंट. – इस सीट पर भाजपा प्रतयाशियों का बोलबाला दिखा है।

391. सेवापुरी – यहां पर 2009 में सपा अपनी प्रतिद्वन्‍द्वी बसपा से 6000 वोटों से आगे रही, जबकि सपा और बसपा के बीच कांटे की टक्‍कर होती है। 2009 में मुरली मनोहर जोशी भी यहां पीछे हो गये थे।

392. भदोही – यह सीट कई पार्टियों के बीच पहुंच चुकी है। 2009 में बसपा मा्त्र 6000 वोटों से आगे रही।

393. ज्ञानपुर – इस सीट पर बसपा या सपा के खाते में रही । यहां 2009 में करीब 43 प्रतिशत वोटिंग हुई।

394. औरई – यह सीट भाजपा और बसपा के पास रहती है।

395.छनबे (अनुसूचित जाति) – यह सीट भाजपा और बसपा के खाते में जाती रही है। हालांकि 2009 में बसपा सबसे आगे रही।

396. मिर्जापुर – बसपा और सपा के इस गढ़ में अब भाजपा ने पैर पसारने शुरू कर दिये हैं।

397. माहजवन– इस सीट पर बसपा और सपा एक दूसरे के प्रतिद्वन्‍द्वी हैं।

398. चुनार – यह भाजपा का गढ़ है, लेकिन सपा ने यहां सेंध मारनी शुरू कर दी है।

399. मरिहन –सपा के इस गढ़ में किसी भी अन्‍य दल की नहीं चलती

400. घोरावल यहां भी सपा का गढ़ माना जाता है।

401. रॉबर्ट्सगंज- रॉबर्ट्सगंज की यह सीट सोनिया और राहुल का नाम ही प्रमुख मुद्दा बनकर छाया हुआ है।

402. ओबरा – इस सीट पर सपा का बोलबाला है।

403. दुद्धी (अनुसूचित जाति) – यहां पर मतदान तो 40 से 50 प्रतिशत रहता है। यह सपा का गढ़ माना जाता है।

यह समीक्षा ब्‍लॉग स्‍टंप्‍ड ऑफ से अनुवादित है।

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