सूचना आयुक्त के पद के लिए जोर आजमाइश शुरू

इस पद के लिए मारामारी की वजह सूचना के अधिकार कानून को लेकर उनका लगाव या समर्पण नहीं, बल्कि इससे जुड़ी प्रतिष्ठा और लाभ हैं। केंद्रीय सूचना आयुक्तों का वेतन सुप्रीम कोर्ट के जजों के समान होता है। यहां काम करने में भी काफी आजादी होती है और रोजाना किसी राजनीतिक आका से आदेश नहीं लेने होते। तभी तो कार्मिक विभाग की ही सचिव रही अल्का सिरोही ने भी इस पद के लिए आवेदन कर दिया है। जबकि केंद्र सरकार ने पिछले साल अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से काम करने के पुरस्कार के तौर पर उन्हें खास तौर पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के सदस्य पद पर पहले ही बिठा दिया है।
अब तक मिले लगभग दो सौ आवेदनों में से नौ लोगों के नामों की सूची तैयार की गई है। इन नामों पर प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष की नेता और कानून मंत्री का पैनल अंतिम फैसला करेगा। आवेदन करने वालों में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के पूर्व अध्यक्ष मुकेश चंद्र जोशी ही नहीं, हाल ही में इस अहम पद पर आए लक्ष्मण दास भी हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मौजूदा प्रमुख ओपीएस मलिक, खुफिया ब्यूरो के प्रमुख रहे राजीव माथुर, सीमा सुरक्षा बल के पूर्व डीजी रमन श्रीवास्तव और हाल ही में सेवानिवृत्त हुई उप नियंत्रक और महालेखा परीक्षक रेखा गुप्ता भी इस सूची में शामिल हैं।












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