नेत्रहीन अजीत ने जीती आईएएस बनने की जंग

अजीत 2008 में भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। 791 सफल परीक्षार्थियों में उनका 208वां रैंक था। इतनी अच्छा रैंक आने के बाद भी उन्हें आईएएस के बजाय आईआरपीएस दिया गया था। इसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। यह सब उनके नेत्रहीन होने के कारण किया गया। उसके बाद उन्होंने अपने हक को पाने के लिए कैट की शरण ली। कैट ने 8 अक्टूबर, 2010 को उनके हक में फैसला सुनाया। कैट ने निर्देश दिया कि उन्हें आठ सप्ताह में आईएएस का रैंक दिया जाए। फिर भी उन्हें आईएएस के पद के लिए नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया।
उन्होंने हार नहीं मानी और सांसद वृंदा करात के सहयोग से 29 नवंबर, 2011 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले। प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से उन्हें 16 जनवरी, 2012 को आईएएस अफसर के रूप में नियुक्ति मिली है। 14 फरवरी को नियुक्ति पत्र देकर 20 फरवरी तक मंसूरी में हाजिर होने की सूचना दी गई है।












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