भारत के प्रयास से संतुष्ट मालदीव

गौरतलब है कि नई दिल्ली मालदीव में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच रास्ता निकालने और हालात को आंकने की कोशिश में है। इसलिए वह बुधवरा को अपने विदेश सचिव रंजन मथाई को माले रवाना किया। मथाई मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद के अलावा अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद से भी बातचीत कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक मालदीव में बड़ी अंतरराष्ट्रीय सरगर्मी के मद्देनजर सरकार ने विदेश सचिव को माले भेजने का फैसला लिया। विदेश सचिव आज ही भारत लौट आएंगे।
वैसे इससे पहले भारत ने प्रधानमंत्री के विशेष दूत के तौर पर विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) एम गणपति को बीते सप्ताह मालदीव भेजा था। वहीं इस बीच मालदीव में बढ़ी अंतरराष्ट्रीय सरगर्मी के बीच जहां अमेरिका और यूरोपीय संघ ने अपने दूत दौड़ाए हैं, वहीं भारत की चिंता रणनीतिक लिहाज से खासे महत्वपूर्ण द्वीप राष्ट्र मालदीव में चीन के असर की भी थाह लेने की है।
गौरतलब है कि अपदस्थ राष्ट्रपति ने आरोप लगाए हैं कि चीन को फायदा पहुंचाने वाले एक सौदे को मंजूरी से इंकार के बाद उन्हें सत्ता से बेदखल किया गया। हालांकि मालदीव मामले ने यह स्पष्ट किया है कि इसकी नब्ज पढ़ने में भारत से भी चूक हुई है।












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