अप्रैल से और सस्ती हो जाएंगी मोबाइल काल दरें

2G Spectrum
दिल्ली (ब्यूरो)। टूजी घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था। तमाम लाइसेंस रद्द कर दिए गए। उस दौरान इस तरह का माहौल देश में बनाया गया था कि आनेवाले दिनों में मोबाइल फोन काल की दरें बहुत बढ़ जाएंगी, लेकिन हकीकत यह है कि अप्रैल से मोबाइल की दरें और सस्ती होने जा रही हैं। दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने इन आशंकाओं को फिलहाल विराम लगा दिया है।

उन्होंने कहा है कि अप्रैल में आने वाली नई दूरसंचार नीति से मोबाइल फोन कॉल की दरें सस्ती होंगी। दरअसल, 2008 में दिए गए 122 लाइसेंसों को सुप्रीम कोर्ट की ओर से रद्द करने के बाद माना जा रहा था कि मोबाइल फोन कॉल कीमतों में इजाफा होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पहले आओ पहले पाओ की आवंटन नीति को नकार कर नीलामी प्रक्रिया से स्पेक्ट्रम जारी करने के आदेश दिए हैं। इसके बाद माना जा रहा था कि अगर स्पेक्ट्रम की नीलामी होगी तो पहले के मुकाबले आपरेटरों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।

इस आशंका को देखते हुए ही दूरसंचार जगत कॉल दरों में इजाफे की स्वाभाविक आशंका देख रहा था। खुद सिब्बल ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2 फरवरी को अपनी प्रतिक्रिया में महंगी कॉल दरों का दौर लौटने के संकेत दिए थे, लेकिन सिब्बल ने अप्रैल में लाई जा रही नई दूरसंचार नीति में इसका खास ख्याल रखने का इशारा किया।

उन्होंने कहा कि नई नीति के बाद कंपनियों के पास ज्यादा स्पेक्ट्रम होगा। ऐसी स्थिति में दूरसंचार क्षेत्र के अंदर उच्च कार्यक्षमता पैदा होगी जिससे कॉल दरों में काफी कमी आएगी। नए ऑपरेटरों को कुछ राहत देते हुए दूरसंचार विभाग ने नीति में कहा है कि जीएसएम सेवा प्रदाताओं के लिए 2 गुना 8 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम की सीमा तय की गई है जबकि सीडीएमए ऑपरेटरों के लिए यह सीमा 2 गुना 5 मेगाहट्र्ज है।

नीति में कहा गया है कि लाइसेंस का नवीकरण अगले 10 साल के लिए किया जाएगा। हालांकि अति सघन आबादी वाले क्षेत्रों (दिल्ली, मुंबई) को ध्यान में रखते हुए जीएसएम ऑपरेटरों को 10 मेगाहट्र्ज 2जी स्पेक्ट्रम रखने की अनुमति होगी, जबकि इन सर्किलों में सीडीएमए ऑपरेटर 6.2 मेगाहट्र्ज 2जी स्पेक्ट्रम रख सकेंगे। सेवा एवं सर्किलों के लिए समायोजित सकल आय पर 8 फीसदी की दर से समान लाइसेंस शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। फिलहाल यह 6 से 8 फीसदी के बीच है। लाइसेंस शुल्क सभी कंपनियों को सालाना शुल्क के तौर पर देना पड़ता है।

एक समान शुल्क होने से ऑपरेटरों को कुछ राहत मिल सकती है। दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े जानकार कहते हैं कि सिब्बल के इस संकेतों से उन मोबाइल फोन कंपनियों को मायूसी होगी जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कॉल दरों में इजाफा करने की बात सोच रहे थे। जानकार सिब्बल के इस संकेतों को वक्त की जरूरत मानते हैं। उनका कहना है कि सिब्बल ने इस समय यह बयान देकर बाजार में कॉल दरों को लेकर दुविधा की स्थिति को खत्म कर कर दिया है।

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