सुप्रीम कोर्ट ने एस्सार-लूप की एक न सुनी

गौरतलब है कि सीबीआई ने एस्सार व लूप के खिलाफ विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। जिसमें उसे आईपीसी की धारा-420 (फ्राड) व 120(बी) में आरोपी बनाया गया है। विशेष अदालत ने इस आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए दोनों कंपनियों के अधिकारियों को समन जारी किया था। कंपनियों ने विशेष अदालत के क्षेत्राधिकार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। कंपनी की दलील है कि उन्हें सिर्फ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश में आरोपी बनाया गया है।
उन पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून में आरोप नहीं हैं। ऐसे में उनके मामले की सुनवाई मजिस्ट्रेट की अदालत में होनी चाहिए। विशेष अदालत उनके मामले की सुनवाई नहीं कर सकती। कंपनियों ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया। कंपनियों ने कहा कि जब तक कोर्ट विशेष अदालत के क्षेत्राधिकार के बारे में फैसला करती है तब तक विशेष अदालत में उनके खिलाफ चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी जाए। विशेष अदालत ने उन्हें 22 फरवरी को पेशी के लिए सम्मन जारी किया है उस पर रोक लगा दी जाए।
न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी व न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की पीठ ने मांग ठुकराते हुए कहा कि अगर वे बाद में इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि विशेष अदालत को सुनवाई का अधिकार नहीं है तो वे कार्यवाही निरस्त कर देंगे। हालांकि पीठ ने याचिका पर सुनवाई की मंजूरी दी और सीबीआइ, केंद्र, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, सीपीआइएल और टेलीकाम नियामक टीआरएआइ को नोटिस जारी किया। इन्हें दो सप्ताह में याचिका का जवाब दाखिल करना है।












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