7 हजार की रिश्वत ने लगाया एसडीएम के करियर पर दाग

अभियुक्त के विरूद्घ अगस्त 2010 में एसडीएम, महेन्द्रगढ़ के पद पर रहते हुए, उनके खिलाफ यह अभियोग दर्ज हुआ था। ब्यूरो को भिवानी के निवासी प्रदीप से शिकायत मिली थी उक्त अधिकारी उसका डम्पर राजस्थान से हरियाणा में चलाने की एवज में रिश्वत की मांग कर रहा है। तत्कालीन एसडीएम के रीडर धर्मबीर द्वारा डम्पर को बार-बार रूकवाया गया जो वाहनो के चालको से पैसे लिया करता था और यदि कोई चालक पैसे नहीं देता तो उसका चालान कर देता था।
धर्मबीर, रीडर, एसडीएम, महेन्द्रगढ की सरकारी गाडी और खाली साईन की हुई चालान बुक प्रयोग कर रहा था। पैसे एक अन्य व्यक्ति राजकुमार जो धर्मकांटा पर कर्मचारी था दिये जाते थे। उपरोक्त केस में भी धर्मवीर रीडर ने 7000 रुपये राजकुमार को देने के लिए कहा। शिकायत पर कार्यवाही करते हुये ब्यूरो की टीम द्वारा राजकुमार को रिश्वत लेते हुए रंगे हांथो गिरफ्तार किया गया।
जांच के दौरान दोषी राजकुमार ने माना कि उसने धर्मबीर, रीडर, एसडीएम, महेन्द्रगढ के लिये यह राशि प्राप्त की थी, बाद में दोषी धर्मबीर (रीडर एसडीएम) ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया और जांच अधिकारी द्वारा पूछताछ करने पर बताया कि वह सारी राशि सतबीर सिंह जंगु, एसडीएम, महेन्द्रगढ को देता था और बाद में एसडीएम इस राशि का कुछ हिस्सा उसे देता था। सतबीर सिंह जंगु दोषी ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका डाली थी, जोकि न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गई थी।












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