दिल्ली की हवा करा सकती है हार्ट अटैक

शहरों की धूल और धुएं वाली प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर लोगों के लिए एक बुरी खबर है। ऐसी हवा में सांस लेने से लोग श्वास नली और फेफड़ों की बीमारी की चपेट में तो आते ही हैं, उनमें दिल के दौरे का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
फ्रांस के पेरिस कार्डियोवैस्कुलर रिसर्च सेंटर ने हार्टअटैक पर आधारित 34 अध्ययनों की तुलना करने के बाद पाया कि प्रदूषित हवा में सांस लेने वाले लोगों में दिल के दौरे की आशंका बढ़ जाती है। सेंटर ने बताया कि जिन लोगों में उद्योगों और वाहनों का धुआं सांस के जरिए शरीर के भीतर जाता है, वे स्वच्छ हवा में सांस लेने वालों की तुलना में दिल की बीमारियों से ज्यादा पीड़ित होते हैं। कारखानों और वाहनों के धुएं के जरिए कार्बन मोनो आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड और नाइट्रोजन डाई आक्साइड जैसी जहरीली गैसें मानव शरीर के भीतर पहुंच जाती हैं। इसके अलावा इस धुएं में कार्बन एवं अन्य प्रदूषकों के छोटे-छोटे कण भी मौजूद होते हैं जो फेफड़ों में जमा होकर कई बीमारियों को जन्म देते हैं। ये कण फेफड़ों से रक्त प्रवाह के जरिए दिल तक पहुंच जाते हैं।
ऐसे कण रक्त वाहिनियों को भी खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनकी वजह से रक्त वाहिनियों के सिकुड़ने और फैलने की क्षमता पर असर पड़ता है। इससे रक्त प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है जो अंतत: हार्टअटैक का कारण बनता है। शोध के मुताबिक हवा के प्रति घन मीटर में 10 माइक्रोग्राम से अधिक प्रदूषकों के होने से मानव शरीर पर इसका काफी बुरा असर पड़ता है। ऐसी हवा में लगातार सांस लेने पर एक हफ्ते के भीतर दिल का दौरा पड़ने का जोखिम एक से तीन प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
सेंटर ने बताया कि प्रदूषित हवा से दिल का दौरा पड़ने का खतरा भले ही धूम्रपान, हाइपरटेंशन और मधुमेह जैसे परंपरागत कारणों से होने वाले खतरे से कम है लेकिन सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि वर्तमान समय में ज्यादातर लोगों को प्रदूषित हवा में ही सांस लेनी पड़ती है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों में दिल के दौरे का खतरा बढ़ने की आशंका है।
येल और कोलंबिया यूनिवसिर्टी के वैज्ञानिकों के दुनियाभर में हवा की गुणवत्ता पर गए एक अध्ययन में भारत को सबसे निचला (132वां) स्थान मिला। पड़ोसी देश चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी हवा जहरीली पाई गई। भारत को 100 में से केवल 3.71 अंक ही मिल पाए। एनवार्यनमेंट परफॉरमेंस इंडेक्स (ईपीआई) पर भारत की 125वीं रैंक रही। इस इंडेक्स पर नेपाल 38, बांग्लादेश 115 और पाकिस्तान 120वें स्थान पर रहा। 20 सालों में भारत में वाहनों से प्रदूषण आठ फीसदी और कारखानों से चार फीसदी बढ़ा है। वाहन की बढ़ोतरी में दिल्ली सबसे आगे है। अब खुद समझ लीजिए दिल्ली की हवा कैसी है।












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