रालोद को भारी पड़ा आपराधिक रिकार्ड छुपाना

लखनऊ। विधानसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग की सख्‍ती राजनीतिक दलों पर भारी पड़ रही है। राष्‍ट्रीय लोकदल प्रत्याशी द्वारा आपराधिक रिकार्ड छिपाने पर यूपी के प्रबुद्धनगर (शामली) जिले की कैराना विधानसभा सीट से रालोद प्रत्याशी विशाल कश्यप और उनकी पत्नी का पर्चा आयोग ने खारिज कर दिया। विशाल कश्यप पर आरोप था कि उसने जो नामांकन दाखिल किया है उसमें अपना आपराधिक रिकार्ड छिपाने के लिये वास्तविक नाम कौशल छुपाते हुये विशाल के नाम से अपनी वोट बनवाई।

नामांकन पत्रों की जांच के दौरान आपत्ति दर्ज किये जाने पर रिटॄनग आफिसर जे एस मिश्रा ने रालोद प्रत्याशी का पर्चा निरस्त कर दिया। 9 फरवरी तक मुज फरनगर कलेक्ट्रेट परिसर में हुए नामांकन के दौरान विशाल कश्यप ने रालोद प्रत्याशी के रुप में अपना नामांकन किया था। नामांकन पत्रों की जांच के दिन 10 फरवरी को पीस पार्टी प्रत्याशी याकूब ने आरओ के समक्ष यह आपत्ति दर्ज कराई थी कि विशाल कश्यप पुत्र मांगेराम हिस्ट्रीशीटर है तथा कोयला क्षेत्र में उसकी हिस्ट्रीशीट कौशल पुत्र मांगे के नाम खुली हुई है।

हिस्ट्रीशीटर कौशल ने अपना आपराधिक रिकार्ड मतदाताओं से छुपाने के लिये कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से अपनी वोट विशाल पुत्र मांगेराम के नाम से बनवा ली है। यही नहीं उसने अपना नाम बदलकर ड्राइङ्क्षवग लाईसेंस, राशन कार्ड बनवाते हुये सरकारी राशन गल्ले की दुकान की आवंटित करा ली है। आपत्तिकर्ता ने आरओ को बताया कि विशाल नाम का कोई व्यक्ति है ही नहीं और असली व्यक्ति कौशल कश्यप है।

आपत्तिकर्ता के जवाब में विशाल कश्यप की ओर से यह माना गया कि उसका असली नाम विशाल उर्फ कौशल है तथा उसकी हिस्ट्रीशीट भी खुली हुई है लेकिन वह सजाया ता नहीं है। नामांकन पत्र के साथ दिये गये शपथपत्र में विशाल ने अपनी शिक्षा आठवीं पास दिखाते हुये स्कूल का नाम सरस्वती मां शिक्षा निकेतन जूनियर हाईस्कूल मखियाली दर्शाया था जबकि सुनवाई के दौरान पता चला कि इस नाम से वह कभी स्कूल में दाखिल ही नहीं हुआ।

सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की और पता चला कि कौशल कश्यप के रुप में वह चंदनलाल नेशनल इंटर कालेज में वर्ष 1990-91 में शिक्षा प्राप्त कर चुका है, इससे यह स्पष्ट हुआ कि उसका वास्तविक नाम कौशल ही है तथा उस वक्त तक विशाल नाम का कोई छात्र पढ़ता ही नहीं था। वर्ष 2007 तक वह कौशल के नाम से ही प्रचलित रहा तथा उसके बाद उसने वर्ष 2008 से मतदाता पुर्नरिक्षण अभियान 2009 के बीच छल द्वारा मुज फरनगर विधानसभा क्षेत्र से अपनी वोट बनवाई और इस दौरान उसने अपनी पत्नी वीना बत्रे भी बीडीसी का सदस्य निर्वाचित कराया।

कौशल उर्फ विशाल कश्यप ने न केवल मतदाताओं को भ्रमित किया बल्कि रालोद प्रमुख चौधरी अजित को भी छला और उनसे अपनी वारस्तविकता छिपाते हुये पार्टी सि बल भी प्राप्त कर लिया। एक अन्य आपत्ति पर रिटॄनग आफिसर ने इसी सीट से उनकी पत्नी रीना विशाल का भी नामांकन निरस्त कर दिया है क्योंकि नामांकन पत्रों में उनके पति का नाम कौशल होना चाहिये था जबकि गलत ढंग से विशाल लिखा गया था।

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