पेड न्यूज बना प्रत्याशियों का प्रचार माध्यम

लखनऊ। चुनाव में जहां निर्वाचन की सख्ती प्रत्याशियों पर कड़ी है लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद पेड न्यूज पर पाबंदी नहीं लग पा रही है। पेड न्यूज के सहारे तमाम नेता अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। आयोग ने प्रेस परिषद या फिर स्वयंसेवी संस्थाओं सभी ने मीडिया जगत से पेड न्यूज के बुरे प्रभाव की ओर ध्यान केन्द्रित करते हुए इससे बचने की सलाह दी थी लेकिन इस पर ज्यादा देर तक ध्यान नहीं दिया जा सकता और पेड न्यूज प्रत्याशियों के प्रचार का सहारा बन गया।

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की विधानसभा में जनप्रतिनिधि स्वच्छ और निष्पक्ष चुनकर जायें इसके लिए निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के लिए तमाम पाबंदियां लगा रही है। चुनाव प्रचार में स ती के साथ ही पेड न्यूज पर पाबंदी का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा लेकिन आखिरकार इस पर रोक नहीं लग सकी। कई नेताओं का चुनाव प्रचार इसी के जरिए जोर पकड़ रहा है। वहीं चुनाव प्रचार की सख्ती की बात करें तो अब पहले की तरह दिन-रात कानफोडू शोरगुल का नहीं हो रहा है।

तमाम प्रचार सामग्रियों में आयी कमी आयोग की ही देन है। इससे आयोग ने चुनाव खर्चों को तो कम किया है। विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के फिजूलखर्ची व मतदाताओं को प्रलोभन देने वाले तमाम खर्चों पर पाबंदी लगायी है जिससे प्रत्याशी का संदेश हर व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। निर्वाचन आयोग ने चुनाव को भविष्य में और बेहतर बनाने के लिए प्रयोग के तौर पर हाईटेक व्यवस्थाओं को इस बार माध्यम बनाया है।

पेड न्यूज पर पाबंदी न लगने के कारण प्रत्याशी अपने चुनावी दौरे को बढ़ा- चढ़ाकर मीडिया में भेज रहे हैं। आयोग ने जिले के दो विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 25 केन्द्रों से मतदान का सीधा प्रसारण करने की व्यवस्था करायी है जिससे मतदान केन्द्र पर होने वाली गड़बड़ी एवं अराजकता को तत्काल नियंत्रित किया जा सके। उम्मीद की जा रही है कि अगले चुनावों तक पेड न्यूज पर भी शिकंजा कस सकेगा।

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