गडकरी तालिबानी बयान- बलात्कारियों के हाथ काट दो

चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए गडकरी ने कह- इधर गधे, उधर गधे, चारों तरफ गधे, गधे। घोड़े खा रहे घस, और गधों को मिल रहा चवनप्राश। गडकरी ने इस कविता के साथ अपना भाषण शुरू किया और देखते ही देखते प्रशासन को गरियाना शुरू कर दिया। आगे गडकरी बोले, "हम एक ऐसा प्रशासन चाहते हैं, जहां बलात्कारियों के हाथ कलम कर दिये जायें, ताकि कोई किसी की बहन, बेटी की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत नहीं कर सके।"उन्होंने कहा कि हम ऐसा प्रशासन चाहते है जहां बलात्कारियों के हाथ कलम कर दिया जाएं ताकि कोई किसी की बहन, बेटी की इज्जत के साथ खेलने की हिम्मत न कर सके। कोई नेता इस घिनौने अपराध को रोकने के उपाये नहीं बताता।"
गडकरी से पहले मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि अगर उनकी सरकार आयी तो बलात्कार पीडि़ताओं को आर्थिक मदद देंगे। हालांकि बाद में उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया। खैर गडकरी के इस बयान पर बवाल खड़ा हो गया है। प्रदेश के तमाम राजनेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस का कहना है कि इस तरह के गैरजिम्मेदाराना बयान से भाजपा जनता को भटकाने का प्रयास कर रही है। हालांकि सच पूछिए तो गडकरी का यह बयान काफी हद तक जनता को गलत रास्ते पर ले जाने वाला है। खास कर उस जनता को जो चोरी जैसे छोटे से अपराध पर चोर को पीट-पीट कर मार देती है। अगर हाथ काटने के लिए उन्हें उकसाया गया तो दूर-दराज के गांवों से ऐसी खबरें भी आने लगेंगी कि भीड़ ने बलात्कार के आरोपी के हाथ काटे। हमारी राय यही है कि जिम्मेदार पद पर बैठने के बाद गडकरी को इस प्रकार की टिप्पणियों से बचना चाहिये।












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