2जी में कुत्ते, घोड़े और तोते के नाम की कंपनियां भी

दिल्ली। रिलायंस इंफ्रा ने 2 स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए क्या-क्या खेल किए शायद ही आप अंदाजा लगा सके। पर विशेष कोर्ट में जिस प्रकार से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्टर लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी आशीष ताबांवाला ने खुलासा किया है उससे सोचने वाले दंग हैं। चर्चा है कि रिलायंस इंफ्रा ने स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए कुत्ते, घोड़े व तोते के नाम पर कंपनी तक बना डाली।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान आशीष तांबावाला ने कहा, शाहिद उस्मान के नेतृत्ववाली कंपनी स्वान टेलीकाम की स्थापना रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड या इसके समूह की कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा की गई थी। उन्होंने गवाही दी कि जिराफ कंसल्टेंसी, जेब्रा कंसल्टेंट्स, पैरट, स्वान कैपिटल और टाइगर ट्रेडर्स प्राइवेट लि. की स्थापना एडीएजी समूह के कर्मचारियों द्वारा की गई थी। आरोप है कि ये सभी रिलायंस एडीए समूह की सहयोगी फर्में हैं।
उन्होंने कहा कि यह सही है कि उक्त पांच कंपनियों की स्थापना रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड या इसके समूह की कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा की गई थी। तांबावाला ने कहा कि यह भी सही है कि उक्त पांच कंपनियों के बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया रिलायंस इंफ्रा के कंपनी सचिव रमेश शेनाय द्वारा शुरू की गई थी। तांबावाला ने कहा कि स्वान कैपिटल लिमिटेड ने अपना नाम बदलकर स्वान टेलीकाम कर लिया और इसके बाद इसका नाम बदलकर एतिसलात डीबी टेलीकाम लिमिटेड कर दिया गया।
इसी तरह, टाइगर ट्रेडर्स ने अपना नाम बदलकर टाइगर ट्रस्टीज कर लिया। जिरह के दौरान तांबावाला ने कहा कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर दूरसंचार में कारोबार नहीं करती। उन्होंने कहा कि स्वान कैपिटल का नाम बदलकर स्वान टेलीकाम किए जाने के बाद भी वह कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरी बने रहे। मुझे कभी पता नहीं चला कि जब स्वान कैपिटल का नाम बदलकर स्वान टेलीकाम किया गया तो दूरसंचार कारोबार का अधिग्रहण स्वान टेलीकाम द्वारा कर लिया गया है, भले ही बार बार कंपनी का नाम बदले जाने की जानकारी मुझे थी। तांबावाला को अदालत में विभिन्न दस्तावेज दिखाए गए जिसके बारे में उन्होंने कहा कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रुप की कंपनियों के कर्मचारी आशीष और प्रकाश राठौड़ जिराफ, जेब्रा और पैरट कंसल्टेंट्स के निदेशक थे।












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