सब इंस्पेक्टर के हत्यारे एसपी को उम्रकैद

सजा निर्धारित करते हुए अदालत ने पाया कि अजय गुप्ता की हत्या की साजिश टीटी सिंह और सेवक सिंह ने रची। हत्या समाज के लिए नहीं, मृतक के परिवार को नुकसान पहुंचाने के लिए की गई। इस मामले में पाया गया कि सेवक सिंह ने ही टीटी को हत्या का जिम्मा सौंपा। उसकी धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करके टीटी को तैयार किया। अदालत का मानना था कि इन दोनों को उम्रकैद के दौरान सुधार के अवसर भी मिलने चाहिए।
इसलिए इन्हें आसान उम्रकैद की सजा दी जा रही है। केस हत्या का है और इसमें कोई विशेष तथ्य नहीं है। इसलिए कानून के तहत इन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई जा रही है। इसके अलावा सेवक सिंह निवासी रानीबाग जम्मू और सतपाल सिंह निवासी वार्ड नंबर एक पुंछ को चार हजार रुपये जुर्माना भी लगाया जा रहा है। अगर जुर्माना जमा नहीं हुआ तो छह माह की और कैद काटनी होगी। आरपीसी की धारा 201 में भी इन्हेें दो हजार रुपये का जुर्माना किया जा रहा है। दोनों सजाएं तभी लागू होंगी जब हाईकोर्ट से इन पर मुहर लगेगी।
पुलिस केस के अनुसार तत्कालीन एसपी सेवक सिंह ने थाने में दर्ज करवाई रिपोर्ट में कहा था कि सब इंस्पेक्टर (पीएसआई) अजय गुप्ता, ड्राइवर मोहम्मद अकरम, कांस्टेबल सतपाल सिंह, बाडी गार्ड अब्दुल रज्जाक पेट्रोलिंग ड्यूटी से लौट रहे थे। टीसीपी की क्रासिंग के पास आतंकियों ने घात लगाकर उन पर हमला कर दिया। एक गोली अजय गुप्ता के सिर पर जा लगी। अजय गुप्ता ने सुरनकोट अस्पताल में दम तोड़ दिया। बाद में पुलिस हेडक्वार्टर ने इस केस की जांच क्राइम ब्रांच के हवाले कर दी।
क्राइम ब्रांच ने जांच में पाया कि अजय गुप्ता और सेवक सिंह के बीच अगस्त 1998 को झगड़ा हुआ था। दोनों ने एक-दूसरे पर गन तान ली थी। 13 अक्तूबर 1998 को सेवक सिंह के घर पर पार्टी थी। पार्टी में शामिल एक ठेकेदार अब्दुल खालिक ने उसे घर छुड़वा देने को कहा। सेवक सिंह ने पीएसआई अजय गुप्ता को अपनी जिप्सी में खालिक को छोड़ने के लिए भेजा। अब्दुल खालिक को छोड़कर जब वापस आ रहे थे तो गोली की एक आवाज निकली। एसपीओ मो. अकरम ने देखा कि सतपाल की बंदूक अजय गुप्ता पर तनी हुई है। अब्दुल रज्जाक ने शोर मचाया था कि सतपाल ने अजय की हत्या कर दी है।












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