तनाव में कटी पुराने लखनऊ के लोगों की रात

पथराव व फायरिंग में कई लोगों को चोटें आयीं जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं। तनाव के बीच दिन तो जैसे तैसे कट गया। उसके बाद रात ऐसी थी, मानों हर व्यक्ति तनाव में हो। लोगों को रात भर डर सताता रहा कहीं कोई हमला न हो जाये। पुराने लखनऊ के कई इलाकों में पथराव देर शाम तक हुआ जिसके चलते लोग दहशत में घरों में कैद रहे।
रात भर लोगों ने जाग कर अपने-अपने घरों पर पहरा दिया और लोग अपने-अपने बच्चों को घर के सबसे सुरक्षित स्थानों पर ले गये। पुराने लखनऊ में गलियों की चौड़ाई इतनी कम हैं कि दो लोग एक साथ बराबर से दौड़ नहीं सकते ऐसे में लोगों को डर था कि यदि कोई घटना हुई तो पुलिस को मौके तक पहुंचने में काफी देर हो जाएगी। तनाव से भरी रात के बाद मंगलवार की सुबह हर रोज की तरह हुई। हालांकि इलाके के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है।
गौरतलब है कि सोमवार को दंगे की शुरूआत दरगाह हजरत अब्बास से हुई, जिसके बाद देखते ही देखते दंगा मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में फैल गया। चौपटियां इलाके में पास दो दुकनों में आग लगा दी गयी। जिसकी खबर फैलते ही नूरबाड़ी और हाता नूर बेगम में पथराव शुरू हो गया। कश्मीरी मोहल्ला व वजीरबाग में भी उपद्रवियों ने जमकर हंगामा किया और नारेबाजी की। जैसे-जैसे दंगे की खबर शहर में फैल रही थीं नये-नये इलाकों में दंगा फैलता जा रहा था। हाता नूर बेगम में फायरिंग हो गयी। सआदतगंज इलाके में एक व्यक्ति को गोली लगी है, जबकि पथराव में दो व्यक्ति घायल हो गये, दोनों को इलाज के लिए ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है।
दोपहर बाद आईजी जावेद अहमद ने इलाकों का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। कुछ इलाकों में सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला तो माहौल में तनाव के साथ कुछ शांति हो गयी लेकिन कुछ इलाकों में हंगामा होता रहा। उपद्रव शांत न होता देख आईजी देर शाम एक बार फिर पुराने लखनऊ का दौरा करने पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि पुलिस दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास कर रही थी लेकिन बात नहीं बनी।
डीएम अनिल सागर व डीआईजी डीके ठाकुर ने भारी पुलिस बल के साथ स्थिति को संभालने का प्रयास किया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। चौपटियां में दुकानों में आग लगी तो पुलिस हरकत में आयी और किसी तरह आग पर काबू पाया गया। पुलिस को कई बार दंगाइयों पर बल प्रयोग करना पड़ा। इसी बीच हुई फायरिंग में रियाजुल हसन के हाथ में गोली लगी, जबकि कलीम व एक अन्य व्यक्ति को पथराव के दौरान गंभीर चोटे आ गयीं। घायलों को इलाज के लिए ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। दूसरी ओर दंगे की खबर सुनने के साथ दोपहर बाद ठाकुरगंज में भी दंगा फैल गया। नानकनगर, बाबा हजारा बाग, मुफ्तीगंज और पजावा में दोनों समुदाय के बीच जमकर नारेबाजी हुई।
ठाकुरगंज स्थित आरमा नर्सिग होम के पास उपद्रवियों ने पथराव हुआ। देर शाम नानकनगर इलाके में भी फायरिंग हो गयी। नहीं दिखी पुलिस की कोई रणनीति पुराने लखनऊ में दंगे की वास्तविक शुरूआत रविवार की रात ही हो गयी थी बावजूद इसके पुलिस ने कोई तैयारी नहीं की कि यदि स्थिति बिगड़ी तो क्या किया जाएगा। पुलिस को उम्मीद थी कि मामला शांत हो जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सोमवार की सुबह होते ही पुराने शहर में आग लग गयी। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में हंगामा नारेबाजी व पथराव शुरू हो गया। पुलिस को पता चला तो पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे लेकिन आधी अधूरी तैयारी के साथ।
स्थिति बिगडऩे के बाद सुरक्षा बलों को बढ़ाया लेकिन तब तक उपद्रव बढ़ चुका था। दंगाइयों को खदेडऩे के लिए पुलिस ने हल्की लाठीचार्ज का सहारा लिया। पूरे घटनाक्रम में पुलिस की सही रणनीति की कमीं दिखायी दी। यदि पुलिस मौके की नजाकत को समझती और रविवार की रात ही तैयारी कर ली जाती तथा संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल तैनात कर दिए जाते तो शायद यह स्थिति न होती। पुलिस अधिकारियों ने भी यह बात स्वीकार की कि शुरूआती दौर में फोर्स की कमीं के कारण दंबा भड़क गया।
उधर अफवाहों का बाजार पूरी तरह से गरम है। अफवाह है कि रात के वक्त एक बार दंगा भड़क सकता है। आश्चर्य की बात यह है कि इतना भयानक दंगा होने के बाद भी पुलिस ने कफ्र्यू नहीं लगाया गया है बल्कि धारा 144 लगाकर काम चला रही है।












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