चार्ट बनने के बाद भी पता चल जाएगा कि सीट खाली है या नहीं

Train
दिल्ली (ब्यूरो)। आरक्षण चार्ट बन जाने के बाद टिकट निरक्षकों का राज हो जाता है। उनकी पूरी मनमानी ट्रेन में चलती है किसे बर्थ देना है, यह उनका जन्मसिद्ध अधिकार हो जाता है। यह अधिकार जल्द ही खत्म होने वाला है। अब चार्ट तैयार होने के बाद भी बची हुई बर्थ या सीटों की जानकारी रेलवे यात्रियों को देगा। यानी करंट आरक्षण के तहत पारदर्शिता बरतते हुए यात्रियों को इसकी जानकारी दी जाएगी, ताकि ट्रेन छूटने के तीन घंटे पहले भी यात्रा के लिए करंट आरक्षित टिकट मिल सके।

इसके लिए मुख्य रूप से वेबसाइट को आधार बनाकर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही रेलवे ने अब ईटिकट खुद बेचने का फैसला किया है। यात्रियों को राहत रहेगी क्योंकि रेलवे का शुल्क कम होगा।

रेलवे ने दिल्ली मंडल की तर्ज पर सभी मंडलों को करंट आरक्षण टिकट व्यवस्था पारदर्शी बनाने को कहा है। आरक्षण चार्ट तैयार होने के बाद भी कई बार कुछ बर्थ ट्रेन में खाली रह जाती हैं। इन्हें करंट टिकट के तहत यात्रियों को दिया जाता है। रेलवे द्वारा सही जानकारी न देने के कारण यात्री इसका उपयोग नहीं कर पाते हैं। कुछ अन्य टिकट एजेंट इसका फायदा उठा लेते हैं।

लिहाजा रेलवे प्रशासन ने सभी जोन और मंडल से कहा है कि ऐसी व्यवस्था की जाए, ताकि आम यात्रियों को इसका पता चले। उल्लेखनीय है कि दिल्ली मंडल करंट टिकट की जानकारी फेसबुक के माध्यम से देता है। इससे करंट टिकट के तहत खाली बर्थ की सूचना मिलती है। इसके माध्यम से नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, सराय रोहिल्ला और हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर बने करंट काउंटर से टिकट लिया जा सकता है।

करंट आरक्षण उसी स्टेशन से कराया जा सकता है, जहां से ट्रेन बनकर चलती है। बता दे कि तत्काल और करंट टिकट में काफी अंतर है। तत्काल एक दिन पहले लिया जा सकता है और करंट आरक्षण चार्ट तीन घंटे पहले तक। इसके लिए अतिरिक्त शुल्क भी नहीं देना होता है। साथ ही रेलवे ने अब ईटिकट खुद बेचने का फैसला किया है। यात्रियों को राहत रहेगी क्योंकि रेलवे का शुल्क कम होगा।

जल्द ही स्लीपर व एसी क्लास में टिकटों की बुकिंग में कम सेवा शुल्क लिया जाएगा। इसके लिए रेलवे अब खुद ही ई-टिकटों की बिक्री करने जा रहा है। ई-टिकटों की बिक्री का जिम्मा रेलवे के उपक्रम आइआरसीटीसी के पास है। ई-टिकट में स्लीपर क्लास में दस रुपये व एसी क्लास में बीस रुपये प्रति टिकट सेवा शुल्क लिया जा रहा है। रेलवे अब खुद ही ई-टिकट बिक्री सेवा शुरू करने जा रहा है। जिसमें स्लीपर क्लास में पांच व एसी में दस रुपये ही शुल्क लेगा। यात्रियों को यूजर आइडी व पासवर्ड दिया जाएगा। इससे वह एक माह में आठ बार टिकट बुक कर सकेंगे । रेलवे ने साफ कर दिया है कि इसका प्रयोग ट्रेवल एजेंट नहीं कर सकेंगे।

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