किसके आदेश से ढकी गईं कांशीराम की मूर्ति?

दलबारा सिंह ने नारायण को सौंपे पत्र में मूर्ति ढके जाने पर आपत्ति जतायी है और जानना चाहा है कि यह किसके आदेश से ऐसा हुआ है। फिलहाल इस मामले में कोई कुछ बताने को तैयार ही नहीं। आयोग ने गत सात जनवरी को बसपा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री मायावती और उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी की मूर्तियों को ढकने का स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया था।
मूर्ति ढके जाने के आदेश के क्रम में गोमतीनगर इलाके में मायावती के साथ ही लगी कांशीराम की मूर्ति को भी ढक दिया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी अनिल कुमार सागर ने कहा था कि मूर्तियों का स्ट्रक्चर एक होने के कारण दोनों को ही ढकना पड़ा। आयोग ने स्व. कांशीराम की मूर्ति ढके जाने के संबंध में जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब कर ली है।
सागर पहले तो इस मुद्दे पर कुछ बोलने से कतराते रहे लेकिन बाद में कहा कि इस बाबत लखनऊ विकास प्राधिकरण से पूछिये लेकिन काफी देर में उन्होंने स्वीकार किया था कि कांशीराम की प्रतिमा को ढकने का कोई आदेश नहीं है लेकिन कांशीराम और मायावती की प्रतिमाओं का स्ट्रक्चर एक साथ है इसलिए मजबूरन उसे ढकना पडा। बसपा समर्थकों का कहना है कि आखिर मान्यवर की मूर्ति किसके आदेश पर और क्यों ढकी गयी। ज्ञात हो कि बसपा अध्यक्ष ने मूर्ति ढके जाने की आलोचना की थी और कहा था कि यह आदेश दलित विरोधी ताकतों के दबाव में दिया गया था। आयोग ने बसपा की इस प्रतिक्रिया पर कडी आपत्ति जतायी थी और चेतावनी दी थी कि बसपा का चुनाव चिन्ह हाथी जब्त किया जा सकता है।












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