युवती व उसके प्रेमी को आजीवन कारावास

उल्लेखनीय है कि क्षेत्र के गांव लिसान निवासी राकेश कुमार का छह वर्षीय बेटा हैप्पी 4 अप्रैल 2010 को अचानक से ही घर से लापता हो गया था। परिजनों ने इस बाबत खोल थाना में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था। अपह्रत हैप्पी की उसी दिन हत्या करने के बाद शव गांव की ही बणी में फैंक दिया गया था। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बणी से हैप्पी के शव को बरामद कर हत्या का मामला दर्ज कर लिया था। हत्यारे ने मामले को भटकाने के लिए हैप्पी के शव के पास कुछ टोटका भी किया था।
हैप्पी का ब्लाइंड मर्डर सुलझाना पुलिस के चुनौती बन चुका था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीआइए को सौंपी गई थी। सीआइए पुलिस ने तफ्तीश के दौरान संदेह के आधार पर मृतक हैप्पी की ही बुआ सुनीता को इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ की तो सारे मामले की परत खुलती चली गई। सुनीता ने पुलिस को बताया कि वह गांव के ही रहने वाले युवक जगजीत से प्रेम करती है। हैप्पी की मां को इस बात का पता चल चुका था तथा वह अकसर उसे ताने दिया करती थी।
हैप्पी की मां से बदला लेने के लिए ही उसने अपने प्रेमी जगजीत के साथ मिलकर पहले तो हैप्पी का अपहरण कराया तथा बाद में जगजीत ने हैप्पी का कत्ल किया। हत्या के बाद जगजीत ने सुनीता से मोबाइल पर बातचीत भी की थी। इस मामले में पुलिस ने सुनीता व जगजीत को पुलिस ने दबोच लिया था। इस मामले में अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष की तरफ से 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाते हुए धारा 302 व 120 बी में दोनों को आजीवन कारावास, धारा 363 ए में 3 साल सजा व 3000 रुपए जुर्माना, जुर्माना न भरने पर 3 महीने की सजा, धारा 364 आईपीसी में 5 साल सजा व 5000 रुपए जुर्माना व जुर्माना न भरने पर 6 महीने की सजा और धारा 201 में 2 साल सजा, 2000 रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है।












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