भीतरघातियों से परेशान सपा बसपा व भाजपा
मिर्जापुर सदर सीट पर कब्जा करने वाली सपा को भाजपा व बसपा से कडी चुनौती मिल रही है। इस सीट पर कांग्रेस का कोई नाम लेवा नही है। मिर्जापुर सीट पूरे पूर्वांचल में भाजपा का गढ़ मानी जाती रही है लेकिन बीते चुनाव चुनावों में उसका किला ध्वस्त हो गया। 2002 के चुनाव में यह सीट भाजपा के हाथ से निकल गयी। सपा के कैलाश चौरसिया इस बार तिगडी लगाने के लिए मैदान में हैं तो भाजपा ने मनोज जायसवाल को मैदान में उतारा है। उधर बसपा पूर्व शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र के सहारे है।
भीतरघात सपा भाजपा व बसपा तीनों में है। भाजपा का एक बडा वर्ग मनोज जायसवाल को पसंद नहीं कर रहा है। बडी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता खुलेआम रंगनाथ के साथ खड़े हैं। सपा में भीतरघात भाजपा से अधिक दिख रहा पर यहां अनुशासन के डंडे के डर से खुलेआम नहीं हो रहा है लेकिन अन्दर ही अन्दर खेल चल रहा है। सपा के बडे नेता प्रचार के दौरान कह रहे हैं कि हम तो सपा के है सपा के लिए वोट मांग रहे हैं आगे आपकी मर्जी। सपा में भी काफी लोग वर्तमान विधायक को फिर से जीतते नहीं देखना चाहते यह बात पार्टी के बड़े नेता भली प्रकार जानते हैं।
सपा प्रत्याशी के साथ उसका परम्परागत कार्यकर्ता नही है। भीतरघात से बसपा भी बच नहीं सकी है। भले ही बसपा के वोट नदी की अन्र्तधारा के समान होते हों पर पार्टी के पदाधिकारी उम्मीदवार के साथ प्रचार के दौरान साथ नहीं दिखते। भाजपा के मनोज जायसवाल को नाराज भाजपाईयों को मनाने तथा पुराने कार्यकर्ताओं को खड़ा करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। भाजपा को संतोष है कि 2009 के लोकसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी नगर सीट पर सपा से आठ हजार वोटो की बढत थी जबकि चार अन्य विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशी तीसरे चौथे स्थान पर रहा था। सन 2002 व 2007 के विधानसभा चुनावों के बाद सपा को विजय मिली थी।













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