माया की दलील को चुनाव आयोग ने नकारा

election commission
नयी दिल्ली। चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती और बसपा के चुनाव चिह्न हाथी को ढकने के लिए जारी किए अपने आदेश पर पुनर्विचार करने से आज इनकार कर दिया। साथ ही, बसपा प्रमुख के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि यह निर्देश दलित विरोधी और जातिवादी है। चुनाव आयोग ने कहा कि वह अपने आदेश पर पुनर्विचार करने का कोई औचित्य नहीं समझता।

आयोग ने एक बयान में कहा कि वह इस बात को लेकर परेशान है कि उत्तर प्रदेश की मुख्‍यमंत्री ने आयोग के आदेश को दलित विरोधी और जातिवादी मंशा से भरा बताकर गंभीर आरोप लगाए हैं। चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि आयोग को खेद है कि इस तरह का आरोप लगाया गया। आयोग ने कहा कि वह बड़ी पार्टियों और उनके नेताओं से बहुत अधिक जिम्मेदारी और संवैधानिक शिष्टता की उम्मीद करता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि वह एक वरष्ठि नेता हैं मैं क्या कह सकता हूं? उन्हें इस तरह की टिप्पणी करने से पहले सोचना चाहिए। बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा की शिकायत का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने उनके इस तर्क को खारिज कर दिया कि प्रतिमाओं को पार्टी कोष से तैयार कराया गया था और हाथियों की भंगिमा पार्टी के चुनाव चिह्न से अलग है।

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