छात्रों को विश्‍वास- सपा आयी तो खुलेंगे छात्रसंघों के ताले

अजय मोहन
उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में लगातार चुनावी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। मुस्लिम, दलित और ओबीसी को लेकर पार्टियों के बीच जंग छिड़ी हुई है। इस जंग में सिर्फ समाजवादी पार्टी एक ऐसी पार्टी है, जो सबसे ज्‍यादा निश्चिंत है, क्‍योंकि यूपी के युवा उनके साथ हैं। युवाओं से हमारा तात्‍पर्य है विश्‍वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों से। जी हां इन छात्रों ने आंख बंद कर विश्‍वास कर लिया है कि अगर सपा की सरकार आयी तो उनके छात्रसंघों के ताले जरूर टूटेंगे। वो ताले जो बसपा सरकार के आते ही पड़ गये थे।

अगर आप इस समय यूपी के चुनावी मैदान में जायें तो सपा की रैलियों में आने वाली भीड़ में 70 फीसदी युवा ही दिखेंगे। ये वे युवा हैं जो अपना उज्‍जवल भविष्‍य चाहते हैं। ये वो हैं, जो अच्‍छी शिक्षा व्‍यवस्‍था और बेहतरीन रोजगार चाहते हैं। खास बात यह है कि इन युवाओं को पूरा विश्‍वास है कि अगर सपा की सरकार आयी तो उनकी आधी समस्‍याएं हल हो जायेंगी।

हालांकि मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र अखिलेश यादव के भी लगभग सभी भाषणों में युवाओं, बेरोजगारों पर ही जोर दिया जाता है। हर भाषण में कन्‍या विद्या धन की राशि को बढ़ाने की बात की जाती है। छात्रसंघों के ताले खुलवाने के वादे किये जाते हैं और गरीब छात्रों को मुफ्त शिक्षा दिये जाने की बात की जाती है। वैसे सच पूछिए तो ये तीनों चीजें यूपी की जरूरत बन चुकी हैं। यही कारण है कि तमाम युवा संगठन आज सपा के चुनाव प्रचार में उतर आये हैं। इन संगठनों में यूथ वेलफेयर सोसाइटी और डा. राम मनोहर लोहिया युवा संगठन प्रमुख हैं। इनके अलावा जिला स्‍तर के युवा संगठन भी अखिलेश यादव के जयकारे लगा रहे हैं।

वनइंडिया ने जब यूथ वेलफेयर सोसाइटी के प्रदेश सचिव मोहम्‍मद दानिश सिद्दीकी से बात की तो उन्‍होंने कहा कि माया सरकार आने के बाद से छात्रसंघों पर ताले पड़ गये। इस वजह से छात्रों की आवाज हर जगह दबा दी गई। विश्‍वविद्यालय अपनी मनमानी पर उतर आये और देखते ही देखते छात्रों के अधिकारों का जमकर हनन हुआ। लेकिन अब छात्रों की आवाज को वापस लाने का समय आ गया है।

वहीं समाजवादी छात्रसभा लखनऊ के नगर अध्‍यक्ष एवं क्रिश्चियन पीजी कॉलेज के पूर्व अध्‍यक्ष फखरुल हसन उर्फ चांद मियां का कहना है कि राज्‍य के नौजवानों को मुलायम सिंह यादव पर पूरा भरोसा है कि उनके आते ही छात्रसंघ के ताले खुलेंगे। ये ताले सिर्फ छात्रराजनीति के लिए नहीं बल्कि देश की राजनीति को भी मजबूती मिलेगी। क्‍योंकि छात्रसंघ राजनीति की नर्सरी है और यहां से निकलने वाले हाईली क्‍वालीफाइड नेता ही देश को आगे ले जा सकते हैं। पढ़े-लिखे नेताओं के आने से ही देश से भ्रष्‍टाचार खत्‍म होगा और लोगों को रोजगार मिलेगा।

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