ओबीसी वोट को लेकर तेज हुई राजनीतिक खींचतान

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव में जुटे राजनीतिक दलों में अति पिछड़ा वर्ग के वोट को लेकर खींचतान तेज हो गयी है। सत्ताधारी दल बसपा ने जहां पिछला चुनाव अनुसूचित जाति और ब्राहमण वोट बैंक के सहारे जीता था तो इस बार अति पिछड़े वर्ग को अपने पक्ष में करने में जुटा है। यूपी में कोयरी, कहार, केवट, कुम्‍हार, गडेरिया, तेली, नट व लोहार आदि अति पिछड़े वर्ग में आते हैं जबकि यादव, जाट और लोध पिछड़े वर्ग में हैं।

विभिन्न राजनीतिक पार्टियां इन्हें अपनी ओर खींचने में जुट गयी हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, जनक्राति पार्टी के संस्थापक कल्याण सिंह और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह का यादव, लोध और जाट में अच्छा खासा प्रभाव है और यह जातियां उनका वोट बैंक मानी जाती हैं। प्रदेश में अति पिछड़ों का ऐसा कोई नेता नहीं है जो अपने वोट बैंक को खास तरह से प्रभावित कर सके लिहाजा कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी इस वर्ग को लुभाने में लगी हैं।

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने पांच दिवसीय जनसम्पर्क अभियान के अपने तीसरे दौर में रमाबाईनगर में जनसभा को अति पिछड़ा रैली का नाम दिया था। भाजपा अति पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण में मुसलमानों को दिये गये साढ़े चार प्रतिशत आरक्षण को मुद्दा बना रही है। भाजपा नेता अति पिछड़ों के बीच इस संदेश के साथ जा रहे हैं कि केन्द्र सरकार अति पिछड़ों के हक पर डाका डाल रही है और उनके कोटे का आरक्षण मुसलमानों को देकर उनका वोट पाना चाहती है।

भाजपा ने चार प्रतिशत कोयरी वोट पाने के लिये राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के घोटाले के आरोपी और बसपा तथा मंत्रिमंडल से निकाले गये बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी में शामिल किया लेकिन यह दांव पार्टी के लिये उलटा होता दिखायी दे रहा है देखना यह है कि कुशवाहा अपनी जाति का कितना वोट भाजपा के लिये जुटा पाते हैं यह चुनाव में तय होगा। वहीं कांग्रेस और बसपा की नजर भी अति पिछड़ों के कुर्मी वोट पर है।

कांग्रेस ने इसके लिये केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को आगे किया है। पार्टी ने उनके बेटे राकेश वर्मा को बाराबंकी से प्रत्याशी भी बनाया है। बेनी वर्मा उत्तर प्रदेश के चुनाव में पूरी ताकत के साथ लगे हैं। बेनी वर्मा के अलावा कांग्रेस के पास अनुसूचित जाति के अध्यक्ष और बाराबंकी से सांसद पूर्व नौकरशाह पी.एल.पुनिया भी हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी पुनिया कभी बसपा प्रमुख मायावती के काफी करीबी माने जाते थे। बसपा के पास अति पिछडे वर्ग को आकर्षित करने के लिये पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य और लालजी वर्मा जैसे नेता हैं। अब देखना यह है कि जातिगत वोटों की राजनीति में किस दल को कितना लाभ होता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+