लोकतंत्र के त्योहार में हथियारतंत्र

उत्तराखंड में गदरपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेंस के प्रत्याशी तथा पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के भतीजे मनीष तिवारी पर कुछ असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया, जिसमें वह बाल-बाल बच गये। पुलिस की मानें तो तिवारी के वाहन पर लाठी डंडो से हमला उस समय किया गया जब वह अपना नामांकन पत्र लेने के लिये निवार्चन अधिकारी के कार्यालय जा रहे थे। ये या तो फिर आपसी मामला था या फिर चुनावी रंजिश मगर यूपी की बात करें तो एक खुफिया सूचना ने पुलिस की नींद उड़ा रखी है। पुलिस को सूचना मिली है कि विधानसभा चुनाव में जरुरत पड़ने पर अपने प्रतिद्वंद्वियों से हिसाब बराबर करने के लिए नालंदा, मुंगेर और आजमगढ़ से असलहों की खेप सूबे के कई जिलों में पहुंचा दी गई है।
यह भी आशंका जताई जा रही है कि गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, मेरठ, कानपुर, लखनऊ और इलाहाबाद समेत तीन दर्जन जिलों में दबंग उम्मीदवार किसी भी कीमत पर चुनाव नतीजा अपने पक्ष में करने के लिये अवैध हथियारों का इस्तमाल कर सकते हैं। इस सूचना से प्रशासन हलकान है कि कई उम्मीदवार लोकतंत्र की चुनावी लड़ाई हथियार-तंत्र के जरिए लड़ने की भी तैयारी कर रहे हैं। यह आशंका देखते हुए यूपी के पुलिस महानिदेशक अतुल गुप्ता ने सभी जिलों के कप्तानों को निर्देश दे दिया है कि प्रत्याशी की सुरक्षा की वह अपने स्तर पर समीक्षा करें। श्री गुप्ता ने कहा है कि जहां आवश्यक्ता हो वहां पर प्रत्याशी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाये।
हथियारों की तस्करी पर पैनी नजर
पुलिस को खुफिया सूचना मिली है कि ट्रेन, बस और चारपहिया वाहनों से तस्करी कर गाजीपुर-बक्सर बार्डर, भभुआ-चंदौली बार्डर, बलिया-उजियार व छपरा के रास्ते हथियार लाए जा सकते हैं। आपको बताते चलें कि वर्ष 2009 में इलाहाबाद में कौशांबी निवासी जितेन्द्र को हथियार तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया था। जितेंन्द्र के निशांदही पर ही पुलिस ने लगभग 3 दर्जन शूटरों को गिरफ्तार किया था जो चुनाव में दहशत फैलाने की फिराक में थे। पुलिस को सूचना मिली है कि यह गैंग एक बार फिर सक्रिय हो गया है।
पुलिस को उसके मुखबिरों ने सूचना दी है कि पिस्टल को मुंगेर से 15 हजार में खरीदकर और तमंचे को 1 हजार रुपये में खरीदकर इलाहाबाद, मीरजापुर, चंदौली, वाराणसी, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, मऊ, गाजीपुर, जौनपुर, भदोही, कानपुर, चित्रकूट समेत कई जिलों तक सप्लाई किया जा रहा है। बिहार से आने वाले इन हथियारों में पिस्टल की कीमत 20 से 25 हजार और तमंचे को 12 सौ से डेढ़ हजार के बीच है। मुंगेर के 315 बोर तमंचों की सबसे अधिक डिमांड इस समय बनी है।
चुनावी रंजिश के चलते पूर्व में हुए हमलों पर एक नजर
वर्ष 2001: वाराणसी के नदेसर इलाके में बसपा नेता धनंजय सिंह पर हमला हुआ। धनंजय समेत कई घायल, उनके प्रतिद्धंदी अभय सिंह पर आरोप लगा।
जुलाई 2002: मोहम्मदाबाद के ऊसरी चट्टी पर मुख्तार अंसारी पर एके 47 से हमला, दो की मौत, कई घायल।
25 जनवरी 2005: विधायक राजू पाल को गोलियों से शहर के धूमनगंज इलाके में छलनी कर दिया गया।
नवंबर 2006: गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद के विधायक कृष्णानंद राय को भून दिया गया।
वर्ष 2008-09: सपा नेता रमाकांत मिश्रा पर तेजाब फेंका गया। बाद में मामले की जांच सीबीआई ने की।
वर्ष 2009: इलाहाबाद में बसपा नेता उमेश शुक्ला को गोलियों से उड़ाया। इसके अलावा कुंडा में फायरिंग, बसपा नेता ने राजा भैया व अक्षय प्रताप पर हमले का आरोप लगाया। इतना ही नहीं फूलपुर के बरना में सपा की सभा में फायरिंग, तीन घायल, सपा विधायक विजय मिश्र ने हमले का आरोप लगाया। इस साल ही चुनावी रंजिशन कोरांव के ब्लाक प्रमुख, अधिवक्ता व अन्य साथी को गोली मारी गई। इसके अलावा मुख्तार अंसारी व बृजेश गैंग में वाराणसी के चौबेपुर के पास जमकर फायरिंग हुई, चार घायल।
जुलाई 2010: कबीना मंत्री नंदगोपाल गुप्ता पर बम से हमला, राजनीतिक रंजिश में हुए इस हमले का आरोप दिलीप मिश्र व विजय मिश्र पर लगा।
पुलिस को मिली इस खुफिया सूचना में अगर जरा सी भी सच्चाई है तो निश्चित तौर पर इस चुनाव में भी खूनी खेल खेले जाने की उम्मीद प्रबल है। ऐसे में सूबे के पुलिस मुखिया की तरफ से जारी किये गये आदेशों पर अमल नहीं किया गया तो लोकतंत्र के इस महान उत्सव में हथियारतंत्र का ही बोलबाला होगा। इस संबंध में आपकी क्या राय है? हमें जरुर बताईएगा। आप अपनी राय हम तक पहुंचाने के लिये नीचे दिये गये कमेंट बाक्स में लिख सकते हैं। हमें आपकी बहुमुल्य प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।












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