कारगिल में नही गिर रही बर्फ

बर्फिस्तान’ में ही बर्फ का टोटा पड़ गया। जिन इलाकों में हर वक्त तकरीबन माइनस चालीस डिग्री तापमान बना रहता है वहां पर इस बार बर्फबारी न के बराबर हुई है। कारगिल, द्रास, कराकोरम दर्रा और लेह के दूरदराज के तमाम प्रमुख बर्फीले इलाके स्नोफॉल का इंतजार करते रह गए और पूरी की पूरी बर्फ दक्षिणी पीरपंजाल इलाके (निचले इलाके) में पड़ गई।
इन इलाकों में बर्फबारी पर नजर रखने वाले स्नो एंड एवलांच स्टडी इस्टेबलिशमेंट (सासे) के वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा अब तक के इतिहास में पहली बार हुआ है। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि इस बार कारगिल, द्रास और कराकोरम दर्रोंपर महज बीस से पच्चीस सेंटीमीटर ही बर्फ गिरी है, जबकि दक्षिणी पीरपंजाल(बनिहाल पास, धौलाधार रेंज, मनाली की चोटियां और मध्य हिमालय का हिस्सा) में 80 से 90 सेंटीमीटर बर्फबारी रिकार्ड की गई। वह कहते हैं कि इस मौसम में ग्रेट हिमालय (कारगिल, द्रास, कराकोरम दर्रा) में उतनी बर्फबारी हो जाती है जितनी कि इस बार निचले इलाकों में पड़ी है।
ऐसा क्यों हुआ, इस सवाल पर मौसम विज्ञानी अश्वघोष ने बताया कि अभी इस पर उनका विभाग जानकारियां जुटा रहा है, उसके बाद ही कुछ स्पष्ट होगा लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि पश्चिमी विक्षोभ बहुत ही निचले स्तर पर बना था। इसके अलावा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस अपनी वास्तविक दिशा से कुछ हद तक भटक भी गया था। यही कारण रहा कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने ऊपरी इलाकों पर बर्फबारी न करके निचले इलाकों में जबरदस्त स्नोफॉल करा दिया। हालांकि उनका कहना है कि आने वाले समय में ग्रेट हिमालय में जमकर बर्फबारी होगी।












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