ना ददुआ न ठोकिया का डर, अब होगा स्‍वतंत्र मतदान

UP assembly polls
चित्रकूट। "इस प्रत्‍याशी को पहचान लो और ये है इसका चुनाव चिन्‍ह इसी पर मुहर लगाना वरना पूरे परिवार से हाथ धो बैठोगे। खुद तो जाओगे ही पीछे कोई रोने वाला भी नहीं बचेगा।" डकैतों का यह फरमान तीन दशक तक कमोबेश हर लोकसभा या विधानसभा चुनाव में जारी होता रहा है, विधानसभा का यह पहला चुनाव होगा जब मिनी चम्बल के नाम से चर्चित इस क्षेत्र के मतदाता स्वतंत्र मतदान कर अपना विधायक चुनेंगे।

अब अगर पिछले तीन दशक के लोकसभा या विधानसभा के चुनावों पर नजर डालें तो साफ हो जायेगा कि बांदा-‍चित्रकूट लोकसभा क्षेत्र के अलावा विधानसभा क्षेत्र नरौनी, बबेरू और कर्वी, मऊ-मानिकपुर के अलावा फतेहपुर जनपद के खागा व किशुनपुर सहित मध्‍य प्रदेश के तीन लोकसभा क्षेत्रों के मतदाता पाठा के बीहड़ के खूंखार डकैत शिवकुमार उर्फ ददुआ और अम्बिका पटेल उर्फ ठोकिया के फरमान पर वोट दिया करते थे।

सीधे शब्‍दों में कहें तो ददुआ और ठोकिया जिसे कह दें वही सांसद और विधायक होता था। वैसे यह बहुत पुरानी बात नहीं हैं आज भी ऐसा होता मगर वह लोकसभा या विधानसभा चुनावों में नहीं बल्कि ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनाव में। डकैत आज भी इन पदों के लिये प्रत्‍याशी तय करते हैं। यहां डकैतों के फरमान का खौफ हर मतदाता पर छाया रहता था। इसी का नतीजा रहा है कि 2005 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में दस्यु ददुआ का बेटा वीर सिंह चित्रकूट जिला पंचायत का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया था और दस्यु ठोकिया की एक चाची सरिता निर्विरोध कर्वी ब्लॉक प्रमुख, दूसरी चाची सविता जिला पंचायत सदस्य एवं तीसरी चाची ग्राम प्रधान चुनी गई थी।

इतना ही नहीं वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में ठोकिया की मां पियरिया देवी नरैनी विधानसभा क्षेत्र से राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) से चुनाव लड़ी और 27,251 मत पाकर दूसरे स्थान पर रही। पांच लाख रुपये का इनामी डकैत ठोकिया मां के चुनाव प्रचार में अपने गिरोह के सदस्यों के साथ दिनदहाड़े कस्बों के नजदीक वाले गांवों में धावा बोलता रहा है। उसी चुनाव के समय यह शिकायत निर्वाचन आयोग तक पहुंची तो मतदान के एक हफ्ते पहले सभी प्रचार वाहन जब्‍त करा लिये गये और मतगणना में पुलिस ने उसके एजेंट तक को नहीं घूसने दिया था।

उस चुनाव में बसपा प्रत्‍याशी पुरुषोत्‍तम नरेश द्विवेदी चुनाव जीत गये। हार का अंतर बमुश्किल 3 हजार था। ठोकिया की मां पियरिया आज भी यह आरोप लगाती है कि पुलिस और प्रशासन ने अपनी नाक बचाने के लिये वोटों की गिनती में उलट-फेर किया था जिसके चलते वह हार गई। परिणामत: पाठा में खुलेआम विचरण करने वाले ददुआ को 2007 में, ठोकिया को 2008 में और रागिया को 2011 में पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया था। बीहड़ में अब सिर्फ एक डकैत स्‍वदेश पटेल उर्फ बलखडि़या ही बचा है जो रागिया की मौत के बाद से अंडरग्राउंड है। ऐसे में चित्रकूट की मऊ -मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्‍याशियों और वोटरों का कहना है कि अब निष्‍पक्ष चुनाव होगा और मतदाता स्वविवेक से मतदान कर अपनी मर्जी से विधायक चुनेंगे।

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