40 साल बाद मैदानों में हुई बर्फ की बरसात

Himachal towns get snow after 40 years
दिल्ली (ब्यूरो)। 40 साल बाद हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में बर्फबारी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के ज्यादा सक्रिय होने के कारण इस बार निचले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है। दिल्ली में भी ठिठुरन बढ़ गई। अधिकतम तापमान 17.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री रहा। मौसम विभाग ने भारी बर्फबारी और बारिश की चेतावनी भी दी है। हिमाचल के मैदानों तक करीब 40 साल बाद बर्फ लौटी है। शुक्रवार रात से राज्य में हो रहे हिमपात ने निचले हिमाचल में मैदानी क्षेत्रों तक अपनी चमक बिखेरी।

धौलाधार की बर्फ 70 के दशक के बाद पहली बार पालमपुर, शाहपुर, बड़ोह, मसरूर, बोहड़क्वालू और नूरपुर तक पहुंची। इससे पहले धर्मशाला तक ही हिमपात होता था। और तो और पंजाब से सटे ऊना जिला के चिंतपूर्णी और अंब की पहाड़ियों पर भी सफेद फाहे देखे गए। हमीरपुर के बड़सर में भी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फाहे गिरे। हालांकि शिमला से किन्नौर की बेल्ट में हिमपात तो हुआ, लेकिन निचले क्षेत्रों तक नहीं गया। आम आदमी बेशक इसे मौसम के ट्रेंड में बदलाव की तौर पर देख रहा है, लेकिन मौसम विशेषज्ञ इससे बिल्कुल हैरान नहीं हैं।

मौसम विभाग की मानें तो ऊपरी हिमाचल में इससे पहले 1990 में लोअर लाइन तक बर्फ आया था और परवाणु में भी हिमपात हुआ था। लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के धौलाधार से मनाली तक ज्यादा सक्रिय होने के कारण इस बार निचले क्षेत्रों में मैदानों तक असर देखा गया। अगले दो दिन भी यह क्रम जारी रहेगा। मौसम विभाग के निदेशक मनमोहन सिंह कहते हैं कि पश्चिमी विक्षोभ के ज्यादा ताकतवर होने के कारण पिछले एक पखवाड़े से मैदानी भागों का न्यूनतम तापमान भी गिर गया था। इस कारण यह बर्फबारी हुई है।

कांगड़ा में शाहपुर के एक बुजुर्ग 95 वर्षीय जगदीश चंद अवस्थी बताते हैं कि इससे पूर्व 1946 में यहां हिमपात हुआ था। इसके बाद 70 के दशक में ऐसा हुआ था। कृषि विश्व विद्यालय पालमपुर से मौसम वैज्ञानिक डा. जे. शेखर कहते हैं कि निचले इलाकों में हिमपात ग्लोबल वार्मिंग की वजह से नहीं है। हिमपात मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कांगड़ा जिले के संदर्भ में देखा जाए तो यहां धौलाधार पर हिमपात होता रहता है। धौलाधार से निचले क्षेत्र में भी टेंपरेंचर डाउन होता जाएगा अर्थात टेंपरेचर बर्फबारी के अनुकूल होता जाएगा तो बारिश की जगह बर्फ ही गिरेगी।

उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग एक अलग प्रक्रिया है जबकि हिमपात के लिए मौसम की स्थिति और साथ उत्तरदायी है। जम्मू-कश्मीर में भी बर्फबारी मैदानी इलाकों तक पहुंच गई। कठुआ जिले में तो लोगों का कहना है कि उन्होंने जीवन में अब तक ऐसी बर्फबारी नहीं देखी। पंजाब के पठानकोट जिले में धारकलां में 40 साल बाद बर्फबारी का नजारा देखने को मिला। यहां एक घंटे के अंदर 6 इंच तक बर्फ गिरी। कुदरत के अद्भुत नजारे पर हैरान लोग भी पूरा लुत्फ उठाते दिखे। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के ज्यादा सक्रिय होने के कारण इस बार निचले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है।

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