सपा की तरह भाजपा ने की बड़ी राजनीतिक गलती

BJP leaders
लखनऊ। समाजवादी पार्टी की ही तरह भारतीय जनता पार्टी ने भी ठीक चुनाव से पहले एक बड़ी भूल की है। यह भूल है बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी में शामिल करना। सपा ने भी वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी विचारधाराओं के विपरीत जाकर कल्याण सिंह को पार्टी से जोड़कर बड़ी राजनीतिक भूल की थी।

इसी का नतीजा रहा कि उनका आधार वोट बैंक छिटक गया था। लोकसभा चुनाव के फौरन बाद मुलायम सिंह यादव ने कल्याण सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया और अपनी इस गलती के लिए मुसलमानों से सार्वजनिक माफी भी मांगी। अब यही गलती भाजपा दोहरा रही है।

चुनाव में भ्रष्‍टाचार को मुख्य मुद्दा बनाने वाली भाजपा ने यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनआरएचएम के कई हजार करोड़ रुपये के घोटाले में मुख्य आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी में शामिल करके अपनी विचारधारा से ही कुठाराघात किया है। भ्रष्‍टाचार के मुद्दे पर हाल ही में अन्ना के जनलोकपाल को भाजपा ने खुलकर सहयोग किया, इतना ही नहीं पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ रथयात्रा भी निकाली, इन सबके बावजूद भाजपा ने सबसे बड़ी गलती कुशवाहा को पार्टी में शामिल करके की। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपनी इस भूल का आभास हो गया है, लेकिन आपसी मतभेदों के चलते वह इस भूल को सुधार नहीं पा रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों की माने तो ऐन चुनाव के वक्त भाजपा का यह कदम उसे काफी नुकसान पहुंचा सकता है। राजनीतिक गलियारों में कुशवाहा के मुद्दे को लेकर चर्चा गर्म है। भाजपा ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अन्ना के आंदोलन को समर्थन करके एक तीर से दो निशाना साधा था। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की निगाह वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर है। यह बात दीगर है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जिस तरह से टीम अन्ना ने कांग्रेस के खिलाफ मुखर होकर आंदोलन की बात कही थी, इससे इन्हें यूपी व उत्तराखण्ड में भी चुनावी फायदे की उम्मीद थी।

यही वजह रही कि संसद में भी जनलोकपाल मुद्दे पर भाजपा ने अपने आपको अन्ना के लोकपाल को पूरा समर्थन कर दिया था। यह बात दीगर है कि राज्यसभा में बिल पर वोटिंग ही नहीं हो पायी और यह मुद्दा धरा का धरा रह गया, लेकिन जिस तरह से टीम अन्ना ने इसके लिए कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया है, उससे पांच राज्यों खासतौर पर यूपी व उत्तराखण्ड में हो रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा को फायदे की उम्मीद दिख रही थी, लेकिन चुनाव से ठीक पहले जिस तरह से भाजपा नेतृत्व ने एचआरएचएम घोटाले के मुख्य आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा को भाजपा में शामिल करके एक बड़ी सियासी गलती की है, इसका नुकसान भाजपा को हो सकता है। इतना ही नहीं भाजपा को अपने मिशन 2014 यानि कि लोकसभा चुनाव में इस भूल नुकसान होगा।

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