अस्पताल में बच्चों के साथ घुसी मादा तेंदुआ

सुबह करीब 6 बजे एक मादा तेंदुआ और उसके दो शावक कड़ोहता गांव में घुस गए थे। अचानक एक शावक निर्माणाधीन पीएचसी के कमरे में घुस गया। इस निर्माणाधीन पीएचसी के साथ ही पुरानी पीचसी है, जहां मरीजों का उपचार होता है। शावक पीएचसी में घुसा तो मादा तेंदुआ उसे ढूंढने के लिए इधर-उधर घूमने लगी। मादा तेंदुआ शावक को ढूंढते अस्पताल के परिसर में आई। लोगों की भीड़ देख तेंदुआ एक शावक के साथ वहां से निकल गई। दूसरी ओर तेंदुआ को देख कर लोग भागने लगे। दूसरा शावक करीब चार घंटे तक भवन में रहा। शावक को देखने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
पंचायत प्रधान वीर सिंह रणौत ने इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। वन खंड भरेड़ी के अधिकारी मौजी राम एवं अन्य स्टाफ मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने शावक को पकड़ कर लकड़ी के पिंजरे में डाल दिया। ग्रामीणों ने अनुरोध किया कि यदि तेंदुए को शावक नहीं मिला तो वह इस क्षेत्र में घूमती रहेगी। लोगों के आग्रह पर वन विभाग के अधिकारियों ने शावक को जगह छोड़ दिया, जहां पर ग्रामीणों ने मादा तेंदुआ का घूमते हुए देखा था।
प्रधान वीर सिंह ने बताया कि कई बार तेंदुए को इस क्षेत्र में देखा था। विभाग से यहां पिंजरा लगाने की मांग की थी। तेंदुए ने मवेशियों को भी निवाला बनाया था। ग्रामीणों ने बताया कि यदि शावक को पकड़ कर ले जाते तो मादा तेंदुआ यहां आतंक मचा देती। वन विभाग के बीओ मौजी राम ने बताया कि मादा तेंदुआ शोरगुल सुनकर जंगल की ओर चली गई थी, शावक को पकड़ कर ग्रामीणों के अनुरोध पर उस जगह छोड़ दिया गया। गांव वालों ने बताया कि दो दशक पहले एक बार शावक को गांव वालों ने पकड़ कर वन अधिकारियों को दे दिया था। उसके बाद कई दिनों लगातार मादा तेंदुआ गांव में हमला करती रही।












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