भारत में डिग्री लेने वाले डॉक्टर विदेश में नहीं करेंगे प्रैक्टिस

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि संसद में पेश नेशनल कमीशन फॉर ह्यूमन रिसोर्स इन हेल्थ (एनसीएचआरएच) विधेयक के पारित होते ही इस कानून पर अमल शुरू कर दिया जाएगा। विधेयक के अनुसार प्रत्येक डॉक्टर को अनिवार्य रूप से तीन साल तक देश की सेवा करनी होगी।
एमबीबीएस और एमएस की डिग्री हासिल करने के बाद डॉक्टर ज्यादा पैसे की चाहत में विदेश चले जाते हैं। जबकि एक डॉक्टर को तैयार करने में सरकार को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। दुखद पहलू यह है कि भारत में डॉक्टरों की भारी कमी होने के बावजूद उनके पलायन को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, भारतीय मूल के लगभग 60 हजार डॉक्टर अमरीका, 25 हजार ब्रिटेन और लगभग 40 हजार डॉक्टर अन्य देशों में कार्यरत हैं। जबकि योजना आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग छह लाख डॉक्टरों की कमी है। संसद में पेश एनसीएचआरएच के नियम 59 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि देश के किसी भी विश्वविद्यालय से एमबीबीएस, एमएस, एमसीएच, एमडी या डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वालों को तीन साल तक अनिवार्य रूप से देश की सेवा करनी होगी।
एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर पीजी की डिग्री के लिए विदेश जाने वाले डॉक्टरों को भी लौटकर तीन साल तक भारतीय जनता की सेवा अनिवार्य रूप से करनी पड़ेगी जो डॉक्टर इन कानूनों की उपेक्षा करेंगे उनका नाम राष्ट्रीय पंजीकरण से हटा दिया जाएगा। स्वदेश वापसी करने पर प्रैक्टिस करने की अनुमति देने या न देने का अधिकार आयोग के पास होगा। बिना अनुमति लिए प्रैक्टिस करते पाए जाने पर ऐसे डॉक्टरों को जेल भेजा जा सकता है।












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